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जिले का असल नाम बुलडाणा की बुलढाणा ? जिलाधिकारी ने दूर किया कन्फ्यूजन निकाला आदेश की बुलढाणा ही है असल नाम


बुलढाणा - मशहूर नाटककार,शेक्सपीयर की एक मशहूर लाइन है नाम में क्या रखा है? उनके एक नाटक का पात्र जूलियट,नेरोमियो से कहता है यह जो तुम अपने नाम के साथ अपना कुलनाम (सरनेम) लिखते हो, यह निरर्थक है। तुम रोमियो हो, जिससे मैं प्रेम करती हूँ। तुम्हारे कुल का नाम क्या है या तुम्हें मिस्टर मोंटेग के नाम से पुकारा जाताया नहीं, ये सब सतही बातें हैं। इस पर ध्यान देने की क्या जरुरत....
 
  शेक्सपीयर के नाटक का यह छोटा सा डायलॉग भले ही एक बड़ी उक्ति बन गई हो लेकिन साहब वो नाम ही तो है जिसमे सब रखा है.नाम एक व्यक्ति के जीवन की पूरी पहचान होती है इसमें थोड़ी से भी ग़लती हो जाये तो बड़ा नुकसान हो जाता है.व्यक्ति का नाम तो छोड़िए देश में तो स्थानों के नाम पर विवाद शुरू है.कई स्थानों के नाम बदलें जा चुके है.नाम का झगड़ा और इससे होने वाला विवाद पुराना है.ऐसा ही एक विवाद आजादी के बाद से विदर्भ के एक जिले बुलढाणा के साथ चल रहा है.विवाद इसके उच्चारण को लेकर नहीं लिखने को लेकर है "ड " कहां जाये या "ढ़" स्वर व्यंजन में संबोधन को पकड़ पाना थोड़ा सा मुश्किल,लेकिन इस जिले का नाम बुलडाणा है या बुलढ़ाणा इसका कन्फ्यूजन आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी शुरू है.जिसे अब जाकर आजादी के अमृत महोत्सवी वर्ष में जिलाधिकारी ने दूर किया है और एक आदेश निकालकर यह स्पस्ट किया है की जिले का नाम बुलढ़ाणा ही है.

शायद इस कन्फ्यूजन की वजह अंग्रेज ही रहे होंगे। अंग्रेजों के चलते शिंदे के सिंधिया बन जाने का उदाहरण हमेशा दिया ही जाता है  शायद नाम के उच्चारण में होने वाली दिक्कत के कारण ही बुलढ़ाणा के साथ भी ऐसा हुआ होगा वैसे सरकारी गैज़ेट बताता है की जिले का असल नाम बुलढ़ाणा ही है लेकिन सार्वजनिक बोलचाल में बुलडाणा हो गया.इसका असर दिखाई भी देता है क्यूँकि सरकारी कार्यालय और दस्तावेजों में लगभग जगहों पर बुलडाणा ही इंगित है लेकिन अब जिलाधिकारी ने इसे बदलने का आदेश निकाला है.

वैसे जिले का पूर्व नाम भिलठाणा था जिसे अंग्रेजों ने अपने उच्चारण की सहूलियत के अनुकूल बदल दिया था.नाम के झोल और घोल का असर जिले के नागरिकों के जीवन के अहम दस्तावेजों पर पड़ता है.शायद अब इस आदेश के चलते एक लंबे समय से नाम से जुड़ा कन्फ्यूजन दूर होगा क्यूँकि साहब "नाम में ही सब कुछ रखा है"