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एकनाथ शिंदे ऐसा भी बोलते है राज्य ने पहली बार देखा और सुना


बतौर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पहली बार विधिमंडल में अपना भाषण दिया।शायद राज्य की जनता ने पहली बार शिंदे को इतना खुलकर बोलते हुए सुना होगा।सरकार के अभिनंदन प्रस्ताव को लेकर दिए गए अपने भाषण में शिंदे भावुक भी हुए आक्रामक भी और विनोदी भी,अपने भाषण के दौरान कई बार उन्होंने फडणवीस को राजनीति का कलाकार कहां। जीवन के अपने सबसे दुखद प्रसंग को याद करते हुए शिंदे की आंखें भी नम हुई और शिवसेना से अपनी बगावत को लेकर उन्होंने अपने स्वभाव से इतर आक्रामक भूमिका भी व्यक्त की.शिंदे ने कहां कि उन्होंने जो निर्णय लिया और बीते दिनों राज्य में कुछ घटा वह एक दिन का कार्यक्रम नहीं है.बीते ढाई वर्षो से सरकार में रहने के दौरान शिवसेना के विधायक अपने आप को ठगा महसूस कर रहे थे.हम न सावरकर के बारे में कुछ कह पा रहे थे और न ही देश के दुश्मन दाऊद से संबंध रखने वाले मंत्री के खिलाफ कार्रवाई ही कर पाए.शिंदे ने कहां वह अब तक यह यकीन ही नहीं कर पा रहे है की वह बतौर मुख्यमंत्री सदन में बोल रहे है ऐसा हुआ है इसके पीछे के कलाकार देवेंद्र फडणवीस है.मैंने कभी पद की लालसा नहीं की मैंने अपने परिवार से ज्यादा शिवसेना और संगठन को महत्त्व दिया।मेरे लिए बालासाहेब ठाकरे और धर्मवीर आनंद दिघे भगवान तुल्य है.
सरकार में रहने के दौरान शिवसेना के चुने हुए विधायकों के अस्तित्व का ही सवाल उठ खड़ा हुआ था.विधायकों को ऐसा लगने लगा था वो अगला चुनाव जीतेंगे भी या नहीं लेकिन अब हम अपने नैसर्गिक गठबंधन  है वह सदन में वादा करते है कि उनके साथ के 50 विधायकों के साथ भाजपा के गठबंधन के 200 विधायकों को अगले चुनाव में जिता कर लायेंगे। विधायकों की व्यथा मैंने पांच बार अपने नेता ( उद्धव ठाकरे ) को सुनाने की कोशिश की मगर मैं कामियाब नहीं हो पाया। 2019 में शिवसेना को उपमुख्यमंत्री पद देना चाहती थी लेकिन वह पद मुझे देना पड़ेगा इसलिए पार्टी ने गठबंधन नहीं किया।शिंदे ने यह भी कहां कि शुरुवात में मुख्यमंत्री का पद भी मुझे दिए जाने वाला था लेकिन मुझे बताया गया कि मेरे नाम का गठबंधन में विरोध हो रहा था लेकिन अजित पवार ने उन्हें यह खुद बताया था कि किसे सीएम बनाना यह पार्टी का आतंरिक मामला है उसमे कोई और क्यों हस्तक्षेप करें।

फडणवीस अनुभवी आदमी है हम उनके साथ मिलकर सरकार चलाएंगे।मुझे मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने हिंदुत्व को पुरस्कृत किया है.मुझे लोगो ने गद्दार कहा अभद्र भाषा का प्रयोग किया लेकिन वह गद्दार नहीं है उन्होंने पार्टी को अपना खून दिया है कई आंदोलनों में हिस्सा लिया है.उनका यह कदम बालासाहेब ठाकरे के विचारों को आगे ले जाने के लिए ही है.

मुख्यमंत्री के रूप में शिंदे का भाषण कई मायनों में ऐतिहासिक रहा.पहली ही बार उन्हें इस तरह सदन में बोलते देखा गया.अपने विनोदी अंदाज में उन्होंने कई ऐसी बातें बोली जिससे ठहाके गूंज गए.शिंदे के भाषण के दौरान बीच-बीच में वो फडणवीस से मशविरा लेते और फडणवीस उन्हें मशविरा देते दिखाई दिए.