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Gadchiroli

समय बदला, सरकार बदली लेकिन जिले की सूरत नहीं बदली; आठ किलोमीटर पैदल चलकर गांव पहुंचे स्वास्थ्य कर्मी


गडचिरोली: देश अपनी आजादी का 75वां अमृत महोत्सव मना रहा है। सभी भारत को दुनिया का अगला महाशक्ति बनने की बात करते हैं। भारतीय नागरिक जहां सॉफ्टवेयर बनाने से लेकर  से लेकर रॉकेट बनाने में महारत हासिल कर चुके हैं। लेकिन अभी भी गडचिरोली जिले के कई तहसीलों में पक्की सड़के नहीं बना पाएं हैं। समय बदल गया, सरकार बदल गई पर अभी तक जिले की स्थिति नहीं बदला। पक्का रास्ता नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में गर्भवती महिलाओं और माताओं को स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण कराने के लिए नालों को पार कर जाना पड़ता है। वहीं स्वास्थ्य कर्मियों को पानी से भरे नालों को पार कर दूर-दराज के गांव में पहुंचना पड़ता है। ऐसा ही एक वीडियो जिले के भामरागढ़ से सामने आया है, जहां सर पर टीका बॉक्स रखकर स्वस्थ्यकर्मी आठ किलोमीटर पैदल चलकर गांव पहुंची। 

भामरागढ़ तहसील के कई गांवों में अभी भी पक्की सड़कें नहीं हैं। बिजली की आपूर्ति नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग पैदल ही गांवों का भ्रमण कर इलाज मुहैया कराता है। भारी बारिश के कारण जिले के नदी नाले उफान पर है। जिसके कारण सड़के गायब हो चुकी हैं। मिली जानकारी के अनुसार, तीन स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता 8 किलोमीटर पैदल चलकर टीकाकरण के लिए गांव पहुंचे। शनिवार सुबह आठ बजे रवाना हुई टीकाकरण टीम देर शाम तक वापस लौटी। ये कर्मचारी बिना खाना खाए दिन भर अपनी ड्यूटी करते रहे। 

मानसून के दौरान स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने की चुनौती

छत्तीसगढ़ सिमा से सटे और जिले के सुदूर छोर पर स्थिति भामरागढ़ तहसील के सुदूर इलाकों के गांवों में पक्की सड़कें नहीं हैं। बरसात के मौसम में स्वास्थ्य कर्मियों को नालों में कमर तक पानी भर कर गर्भवती व स्तनपान कराने वाली माताओं का टीकाकरण कराना पड़ता है। गांवों में सड़कें नहीं होने के कारण स्वास्थ्य कर्मी दोपहिया वाहनों से यात्रा करते हैं और अपनी ड्यूटी करते हैं। लेकिन बरसात के मौसम में यह बेहद कठिन होजाता है। सड़के नहीं होने और उफनते नालों से दोपहिया भी पार नहीं कर सकते हैं। जिससे पैदल ही कमर तक पानी से भरे नालों को पार पर ऐसे गांव में पहुंचना पड़ता है। सड़के नहीं होने के कारण उनके लिए ग्रामीणों को स्वस्थ सुविधा मुहैया कराना बेहद मुश्किल हो जाता है। 

जान जोखिम में डालकर काम कर रहे  

भामरागढ़ तहसील में गुंडेनूर नाला मानसून के दौरान ओवरफ्लो हो जाता है। गुंडेनूर, बंगाली, कोइर, बीनागुंडा, कुवकोडी, तुरेमार्का, दमनमार्का, फोदेवदा, पर्मिलीभाटी, पुंगसुर आदि गांवों में जाने के लिए कोई अन्य सड़क नहीं है। कई बार स्वास्थ्यकर्मी को डोंगी में कमर तक गहरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। पक्की सड़कों के अभाव में कई गाँव से मानसून के दौरान संपर्क टूट जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने जीवन की परवाह किए बिना दूरदराज के गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं।