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पेट्रोल, डीजल जल्द ही सस्ता होने की संभावना, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी जताई उम्मीद


नई दिल्ली: पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर रहीं तो आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कटौती की जा सकती है। उन्होंने कहा, “अगर हालात ऐसे ही रहे, तो मुझे लगता है कि अगली तिमाही में कीमतों में कटौती की गुंजाइश है।”

देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कमी आ सकती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 65 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहती है, तो अगले 2-3 महीनों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कमी की उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने यह बात दिल्ली में आयोजित 'एनर्जी डायलॉग 2025' में कही।

गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 68.96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। भारत ने मार्च 2024 से डीजल और पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। वेनेजुएला के कच्चे तेल पर पहले से ही अमेरिकी टैरिफ लगा हुआ है और रूसी प्रवाह पर भी इसी तरह के प्रतिबंध लगने की संभावना है, इसलिए भारतीय रिफाइनरियां मुख्य रूप से अमेरिका, ब्राजील, पश्चिम अफ्रीका और मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति में विविधता ला सकती हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी उत्पादों को जल्द ही भारतीय बाजारों में शुल्क-मुक्त पहुँच मिल सकती है। इंडोनेशिया के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौते का हवाला देते हुए, जिसके तहत अमेरिकी वस्तुओं पर शून्य शुल्क लगेगा जबकि इंडोनेशियाई निर्यात पर 1 अगस्त से 19% कर लगेगा, ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ भी इसी तरह के समझौते पर बातचीत चल रही है।

तीन साल की बातचीत के बाद, भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच अगले हफ़्ते एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, समझौते के मसौदे की कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। दोनों देश अगले हफ़्ते इस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

वर्तमान आयात

भारत वर्तमान में अमेरिका से 15 अरब डॉलर मूल्य की ऊर्जा आयात करता है और इसे बढ़ाकर 25 अरब डॉलर तक किया जा सकता है। भारत घरेलू तेल और गैस अन्वेषण पर भी दोगुना ज़ोर दे रहा है क्योंकि उसका लक्ष्य ऊर्जा आयात पर देश की निर्भरता कम करना है। सरकार ने ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP) के 10वें दौर के तहत बोली लगाने के लिए 2.57 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र खोला है, जो अब तक का सबसे बड़ा क्षेत्र है। इस अन्वेषण अभियान में कुल 22 राज्य भाग ले रहे हैं।