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Yavatmal: सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों का जलसमाधि आंदोलन, प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद वापस लिया वापस


यवतमाल: उमरखेड़-क्रोडी सड़क की हालत बहुत दयनीय हो गई है और इस सड़क पर यात्रा करने वाले किसानों और नागरिकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसको लेकर ग्रामीणों ने नागरिकों ने पेनगंगा नदी में  जलसमाधि आंदोलन किया। इस दौरान सभी ने प्रशासन से आरसीसी सड़क का तत्काल निर्माण सहित सड़क और नालों पर बने पुलों की ऊंचाई बढ़ाने की मांग की। आंदोलन की जानकारी मिलते ही अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने अपना आंदोलन समाप्त किया।

इस सड़क पर यातायात का बहुत दबाव रहता है और करोडी, पेवा, येलम, कालेश्वर के नागरिकों को अपने बच्चों की शिक्षा और अस्पताल में इलाज के लिए करोडी होते हुए उमरखेड़ जाना पड़ता है। लेकिन सड़क की हालत बहुत खराब होने के कारण कई बार मरीजों की इलाज से पहले ही जान चली जाती है और महिलाओं को सड़क पर वाहनों में उठाकर ले जाना पड़ता है। इस सड़क की खस्ता हालत के कारण ऐसी भयावह तस्वीर भी देखने को मिलती रहती है। ऐसा लगता है कि यह सड़क मानसून के दौरान चार महीने नागरिकों को नारकीय यातना दे रही है।

पिछले चार महीनों में इस सड़क के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाई का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। इस सड़क पर बड़ी मात्रा में कृषि भूमि है और उन्हें अपने घर या बाजार तक उपज ले जाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। चूंकि इस सड़क के अलावा कोई अन्य वैकल्पिक सड़क उपलब्ध नहीं है, इसलिए उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। पहले तो किसान प्रकृति से नाराज हैं, फिर प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही की मार झेल रहे हैं। चूंकि किसान न्याय किससे मांगें, यह सवाल किसानों के बीच उठता है। इसी को लेकर आज नागरिकों द्वारा जल समाधी आंदोलन किया गया।  आंदोलन की जानकारी मिलते ही सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी  मौके पर पहुंचे आंदोलनकारियों से आंदोलन समाप्त करने की मांग की।

हालांकि, आंदोलनकारियों ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया। संघ के उप-विभागीय निर्माण विभाग के इंजीनियर दुधे द्वारा लिखित अनुरोध दिए जाने के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया। प्रहार जनशक्ति पार्टी द्वारा आहूत जलसमाधि आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाओं और बुजुर्गों ने भाग लिया और प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया।