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Amravati

Amravati: मेलघाट का भुत पेड़ बना नागरिकों के आकर्षण का केंद्र; मिठाई, दवाइयां सहित कई चीजों में किया जाता है उपयोग


अमरावती: जिले का जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र मेलघाट इस समय एक पेड़ की वजह से चर्चा में है। मेलघाट में इस समय वातावरण दिन में गर्म और रात में ठंडा होता है। लेकिन इस अंधेरी रात में मेलघाट के जंगल में जगमगाता पेड़ बहुतों का ध्यान खींच रहा है। कई लोगों ने अनुमान लगाया कि यह भूतिया पेड़ है। वहीं कई लोग इस रहस्यमयी पेड़ को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

मेलघाट के जंगल में घूमते हुए चांदी की तरह दिखने वाला एक पेड़ आसानी से देखा जा सकता है। इस पेड़  को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।  इसकी छाल सफेद-भूरी और कभी-कभी लाल रंग की होती है, इसलिए यह कभी कॉड की तरह तो कभी रेडियम की तरह दिखाई देती है। चांदनी रात में यह पेड़ रेडियम की तरह चमकता है इसलिए यह आसानी से दिखाई देता है गर्मियों में भी यह पेड़ रोशनी की वजह से चमकता है। 

रात के अंधेरे में चमकने के कारण इसे घोस्ट ट्री के नाम से जाना जाता है। ये पेड़ पच्चीस मीटर तक ऊंचा होता है। ये पेड़ आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में पाए जाते हैं।  लेकिन विदर्भ के जंगल में भी ये पेड़ नजर आते है।  जनवरी से ही इस पेड़ के पत्ते छड़ने लगते है। और  इसके फूल झालरदार होते हैं और फल शुरू में लाल रंग के होते हैं और बड़े होने पर हरे रंग के हो जाते हैं। 

अप्रैल-मई में सूर्य की गर्मी से बीज निकल आते हैं। ताजे बीज बहुत चमकदार होते हैं। इसकी छाल का उपयोग कपड़ा और रस्सी बनाने में किया जाता है। आदिवासी लोग इस पेड़ के बीजों को इकट्ठा करके भून कर खाते हैं। जबकि लकड़ी का उपयोग हल्के फर्नीचर, कृषि उपकरण आदि में किया जाता है। जबकि पेड़ से निकलने वाले गोंद में औषधीय गुण होते हैं और यह टॉनिक है। 

 इस गोंद का उपयोग मिठाई, दवाइयां, कैप्सूल, सौंदर्य प्रसाधन, टूथपेस्ट में किया जाता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी काफी मांग है। इसके गोंद के कारण इस पेड़ को बड़े पैमाने पर काटा जा रहा है, इसलिए यह पेड़ विलुप्त होने के कगार पर है।  इस पेड़ के बारे में अब जागरूकता फैलाई जा रही है।