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ड्राई जोन क्षेत्र में हुई वृद्धि; पांच तहसीलों में भूजल स्तर में बड़ी गिरावट, भूजल पुनर्भरण के प्रयास आवश्यक


अमरावती: बड़ी मात्रा में भूजल भंडार का उपयोग कृषि एवं घरेलू कार्यों में किये जाने के कारण जल स्तर दिन-ब-दिन गिरता जा रहा है। जिले में पिछले तीन वर्षों में यह औसत से भी अधिक गिर गया है। जिले में ड्राईजोन का दायरा भी बढ़ रहा है। अत: भविष्य की दृष्टि से शुष्क क्षेत्र में प्राथमिकता से भूजल पुनर्भरण के प्रयास किये जाने चाहिए।

इसके अलावा जिन स्थानों पर जल स्तर गहरा हो गया है वहां जलयुक्त शिवार जैसी योजनाओं के माध्यम से जल संरक्षण के कार्यों के साथ-साथ बांधों से गाद निकालना, नए बांधों का निर्माण जैसे कार्य भी भूजल संवर्धन के लिए बहुत लाभकारी हो सकते हैं। इसके लिए जनभागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। 

पिछले कुछ महीनों में जिले में भूजल की स्थिति को देखते हुए, पांच तहसीलों चिखलदरा, चांदुर रेलवे, धामनगांव रेलवे, नंदगांव खंडेश्वर, मोर्शी में जल स्तर कम हुआ है। जबकि भातकुली का जल स्तर स्थिर है। पिछले अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार, अमरावती, अचलपुर, चांदुर बाजार, अंजगांव सुर्जी, दर्यापुर, वरुड में जल स्तर बढ़ गया है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले तीन वर्षों में औसत से अधिक बारिश होने के कारण जिले का जल स्तर 0.90 मीटर बढ़ गया है।

जीएचडीए ने निष्कर्ष निकाला है कि पिछले कुछ वर्षों में ड्राईज़ोन क्षेत्र में वृद्धि के कारण जल स्तर गहरा हो गया है। पिछले तीन वर्षों में जिले में औसत से बेहतर बारिश हुई है। इससे अचलपुर, चांदूर बाजार, अंजनगांव सुर्जी, अमरावती तहसील में जलस्तर काफी बढ़ गया है। हालांकि पिछले तीन वर्षों में जिले में जल स्तर 0.80 मीटर बढ़ गया है, लेकिन 14 में से पांच तहसीलों में जल स्तर कम हो गया है। इससे जमीन से पानी का अवशोषण बढ़ रहा है। इसलिए, शुष्क क्षेत्र और अन्य तहसीलों में जल संरक्षण पर जोर देने के लिए लोगों की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। जल स्तर को बढ़ाने के लिए यदि जल संरक्षण के माध्यम से पानी को जमीन में सोखने का उपाय किया जाए तो निर्धारित जल स्तर को बढ़ाया जा सकता है। 

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