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Amravati

कर्मियों की कमी के चलते अमरावती जिले में पशुधन गणना का कार्य हुआ धीमा, प्रशासन के सामने 28 फरवरी तक पशुगणना पूरा करने की चुनौती


अमरावती: नवंबर महीने में जिले में 21वीं पशुगणना शुरू होने के बाद कर्मियों की कमी के कारण अब तक 50 फीसदी ही काम पूरा हो सका है। पशुगणना पूरा करने की आखिरी तारीख 28 फरवरी है और बाकी 50 फीसदी काम 22 दिन में पूरा करने की चुनौती पशुपालन विभाग के सामने है।

पशुगणना अधूरी होने से अबतक जिले में कितने दुधारू पशु हैं? क्या जिले में दूसरे राज्यों के भी कोई जानवर हैं? कितने पोल्ट्री पक्षी हैं? इसी प्रकार गाय, भैंस जैसे दुधारू पशुओं को भी टीका लगाया गया है या नहीं? यह सभी प्रश्न सामने हैं। इस संबंध में पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए पशु गणना महत्वपूर्ण है, लेकिन जनशक्ति की कमी के कारण इसमें देरी हो रही है। मुर्गी सहित बकरी का मांस, अंडे, दूध और दूध से प्राप्त विभिन्न उत्पाद आहार में शामिल हैं। इसलिए जानवरों की पहचान और लक्षण वर्णन करने के लिए पशु गणना आवश्यक है।

सड़क पर छुट्टा जानवरों का मालिक कौन है, इसकी जानकारी मिलने पर सीधे पशुपालक पर जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही पशुधन के मामले में जिला कितना समृद्ध है, इसकी भी जानकारी इस पशु गणना में मिलेगी। यह तभी संभव है जब पशु गणना तय समय में पूरी हो जाए। पशुपालन किसानों के लिए एक सह व्यवसाय है। पशुधन जिले की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जिससे कई परिवारों को आय और पोषण सुरक्षा मिलती है।

देश में 1919 से हर पांच साल में पशुधन की गणना होती आ रही है। इससे पहले 2019 में 20वीं पशुधन जनगणना आयोजित की गई थी। अब 21वीं पशुधन गणना 25 नवंबर 2027 से 28 फरवरी 2025 तक पूरी की जा रही है। जिले के 2 हजार 284 गांवों से पशुधन गणना की जाएगी। इसमें 2 हजार 17 ग्रामीण और 266 शहरी वार्ड शामिल हैं। अब तक 1 हजार 276 गांवों में पशु गणना पूरी हो चुकी है और 3 लाख 8 हजार 356 पशुओं की खोज की जा चुकी है। पिछली 20वीं पशुगणना में जिले में कुल 5 लाख 94 हजार पशुधन था। इस अभियान में पशुओं के नवजातों के साथ-साथ दूध उत्पादन के लिए गाय, भैंस, बकरी और भेड़ समेत कुत्ते, घोड़े, सूअर और मुर्गे की भी गिनती की जाती है। 

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