logo_banner
Breaking
  • ⁕ अमरावती के शिवनगांव में फिर भूकंप के झटके, लोगों में डर का माहौल ⁕
  • ⁕ Akola: राजनीतिक पार्टियां नगर पालिका चुनावों के लिए बना रहीं मजबूत मोर्चा ⁕
  • ⁕ Wardha: तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे चल रही छात्राओं को उड़ाया, एक छात्रा की हालत बेहद नाजुक ⁕
  • ⁕ राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले का तंज, कहा - पृथ्वीराज चव्हाण दुनिया के सबसे महान भविष्यवक्ता ⁕
  • ⁕ विदर्भ में ठंड का असर बरकरार, नागपुर सहित अन्य जिलों में तापमान में गिरावट, गोंदिया 8.4 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा जिला ⁕
  • ⁕ Nagpur: UCN न्यूज़ की खबर का असर; सिंचाई विभाग की 5 एकड़ ज़मीन पर कब्ज़े का मामला, हरकत में प्रशासन ⁕
  • ⁕ Amravati: दिन दहाड़े प्रॉपर्टी डीलर की हत्या से दहला शहर, खोलापुरी गेट के सब्जी मंडी इलाके की घटना ⁕
  • ⁕ Gondia: अवैध रेत उत्खनन पर अब निर्णायक प्रहार, वैनगंगा नदी का होगा अंतरराज्यीय सीमांकन ⁕
  • ⁕ भाजपा कार्यालय में आज से उम्मीदवारों के साक्षात्कार शुरू, विधानसभा क्षेत्रवार प्रभारी नियुक्त ⁕
  • ⁕ मनपा के बाद ZP–पंचायत समिति चुनाव जल्द जनवरी के अंतिम सप्ताह में मतदान की संभावना ⁕
Amravati

महाराष्ट्र में सबसे अधिक लगभग 446 बाघ; राज्य में 23 प्रतिशत से बढ़ रही बाघों की संख्या, भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट


अमरावती: महाराष्ट्र में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. वन्यजीव संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाघ जनगणना 2022 के अनुसार महाराष्ट्र में लगभग 446 बाघ हैं। 2006 में महाराष्ट्र में बाघों की संख्या 103 थी। 2010 में हुई बाघ गणना के अनुसार, महाराष्ट्र में बाघों की संख्या 168 तक पहुँच गई। 2014 में महाराष्ट्र में कुल 190 बाघ थे। अगले चार वर्षों में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

बाघ जनगणना 2018 के अनुसार, महाराष्ट्र में 312 बाघ थे। बाघों की जनसंख्या वृद्धि का ग्राफ अगले चार वर्षों तक भी जारी रहा। बाघ जनगणना 2022 के अनुसार, आज महाराष्ट्र में लगभग 446 बाघ हैं। महाराष्ट्र वन्यजीव बोर्ड के पूर्व सदस्य यादव टार्टे ने कहा कि यह एक अच्छा संकेत है कि राज्य में बाघों की संख्या 23 प्रतिशत से बढ़ रही है।

बाघ संरक्षण के लिए तैयार की जरूरत

आज भारत बाघों के मामले में विश्व में प्रथम स्थान पर है। महाराष्ट्र में बाघों की सबसे अधिक संख्या होना महाराष्ट्र के लिए गर्व की बात है। 1900 में भारत में कुल 40,000 बाघ थे। 1971 में दुर्भाग्यवश भारत में केवल 1800 बाघ बचे। देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 6 बाघों की संख्या में भारी गिरावट को गंभीरता से लेते हुए भारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 लागू किया। इसके अलावा 1973 में टाइगर रिजर्व योजना की घोषणा की गई।

टाइगर रिजर्व पर बड़ी जिम्मेदारी

यादव तरटे ने कहा कि जंगल में बाघों और अन्य जानवरों की सुरक्षा के लिए टाइगर रिजर्व योजना शुरू की गई। अब जब बाघों की संख्या बढ़ रही है तो ये बाघ जंगल से बाहर नहीं जाएंगे। इस संबंध में टाइगर रिजर्व की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि बाघों और इंसानों के बीच संघर्ष न हो। बाघों का शिकार नहीं हो। टाइगर रिजर्व के साथ-साथ वन विभाग को भी तैयार रहना बेहद जरूरी है। 

देखें वीडियो: