36वें राष्ट्रीय खनन इंजीनियर अधिवेशन का मुख्यमंत्री फडणवीस ने किया शुभारंभ, माइनिंग फॉर विकसित भारत @2047 पर विशेषज्ञों ने किया मंथन
नागपुर: नागपुर में 36वें राष्ट्रीय खनन इंजीनियर अधिवेशन और ‘माइनिंग फॉर विकसित भारत @2047’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। दो दिवसीय इस संगोष्ठी में खनन क्षेत्र में खनन क्षेत्र की नई तकनीक, सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन स्टील और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने मंथन किया गया।
नागपुर में द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के नागपुर लोकल चैप्टर की ओर से 36वें राष्ट्रीय खनन इंजीनियर अधिवेशन का आयोजन किया गया। अधिवेशन में देशभर से खनन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, इंजीनियर और प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान खनन प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें आधुनिक तकनीक और खनन क्षेत्र से जुड़ी तकनीकी उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी प्रमुखता से शामिल हुए। अधिवेशन में क्रिटिकल मिनरल्स, नई तकनीक, कौशल विकास, खदान बंद करने की प्रक्रिया और श्रमिक सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने कहा कि एआई, ड्रोन, ऑटोमेशन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के इस्तेमाल से खनन को ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा सकता है। वहीं, लिथियम और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग को देखते हुए तकनीक और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने पर भी जोर दिया गया। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अपने संदेश में हरित ऊर्जा संक्रमण और संसाधन सुरक्षा के लिए लिथियम तथा दुर्लभ मृदा तत्वों के महत्व पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विदर्भ में खनन के माध्यम से भारत के आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बनने की अपार क्षमता है। उन्होंने बताया कि गढ़चिरोली में करीब 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश और 50 एमटीपीए इस्पात निर्माण क्षमता विकसित की जा रही है।
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