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BAT-BMS App: बीच सड़क ई-रिक्शा बंद करने का 'मजाक' पड़ेगा भारी, हो सकती है 3 साल की जेल और 5 लाख जुर्माना


नई दिल्ली: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो और मोबाइल एप्लीकेशन तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने देश के ई-रिक्शा चालकों और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि 'BAT-BMS' नाम के एक चीनी ऐप का इस्तेमाल करके सड़क पर चलते हुए ई-रिक्शा को अचानक बंद किया जा रहा है। शुरुआत में इसे सोशल मीडिया पर एक 'प्रैंक' या मजाक के रूप में शेयर किया जा रहा था, लेकिन अब इस तकनीकी खामी का इस्तेमाल कर मासूम ड्राइवरों से ठगी के मामले भी सामने आने लगे हैं।

क्या है पूरा मामला और कैसे हो रही है 'हैकिंग'?

दरअसल, 'BAT-BMS' एक वास्तविक मोबाइल एप्लिकेशन है जिसे चीनी कंपनी Shenzhen Grenergy Technology ने बनाया है। इसका मुख्य काम ब्लूटूथ के जरिए स्मार्ट लिथियम-आयन बैटरियों के वोल्टेज, चार्जिंग स्टेटस और हेल्थ को मॉनिटर करना है।

गड़बड़ी तब शुरू हुई जब लोगों को पता चला कि भारत में चल रहे कई कम लागत वाले ई-रिक्शों में जो ब्लूटूथ-इनेबल्ड BMS (Battery Management System) लगा है, उसमें कोई पासवर्ड प्रोटेक्शन या सिक्योरिटी लॉक नहीं है। ऐसे में 10 से 15 मीटर के दायरे में मौजूद कोई भी व्यक्ति इस ऐप के जरिए रिक्शा की बैटरी से कनेक्ट होकर उसकी 'डिस्चार्जिंग' (पावर सप्लाई) को बंद कर देता है, जिससे गाड़ी बीच सड़क पर ही ठप हो जाती है।

उज्जैन में खुली ठगी की पोल

इस तकनीकी लूपहोल का फायदा उठाकर ठगों ने कमाई का जरिया बना लिया है। मध्य प्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने एक 18 वर्षीय युवक को हिरासत में लिया है, जो रात के समय सुनसान रास्तों पर ई-रिक्शा को इस ऐप के जरिए बंद कर देता था। इसके बाद वह खुद को 'मैकेनिक' बताकर ड्राइवर के पास पहुंचता और गाड़ी ठीक करने के नाम पर 200 से 300 रुपये ऐंठ लेता था। ई-रिक्शा चालक संघ की शिकायत के बाद उज्जैन पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया।

3 साल की जेल और 5 लाख जुर्माना

इंटरनेशनल कमीशन ऑफ साइबर सिक्योरिटी लॉ के चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पवन दुग्गल ने इस पर सख्त कानूनी चेतावनी दी है। उनके अनुसार, "आज का ई-रिक्शा सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि एक कंप्यूटर सिस्टम भी है क्योंकि यह डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट पर काम करता है। बिना मालिक की सहमति के बेईमानी या धोखाधड़ी की नीयत से किसी के व्हीकल सिस्टम में छेड़छाड़ करना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 की धारा 66 (धारा 43 के साथ पठित) के तहत एक गंभीर दंडनीय अपराध है।" यदि कोई इस ऐप के जरिए किसी का ई-रिक्शा बंद करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

क्या सभी इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ असुरक्षित हैं?

साइबर और ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैनिक करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह ऐप हर ई-रिक्शा को प्रभावित नहीं कर सकता। पारंपरिक लेड-एसिड (Lead-Acid) बैटरी वाले ई-रिक्शा पूरी तरह सुरक्षित हैं क्योंकि उनमें ब्लूटूथ नहीं होता। जिन लिथियम बैटरियों में कंपनियों ने स्ट्रांग पासवर्ड प्रोटेक्शन या अपना प्रोप्रायटरी (स्वदेशी/निजी) सॉफ्टवेयर दिया है, उन्हें इस ऐप से एक्सेस नहीं किया जा सकता।

सुरक्षा के लिए क्या करें ई-रिक्शा चालक?

अगर आपके ई-रिक्शा में ब्लूटूथ-इनेबल्ड लिथियम बैटरी है, तो डीलर या कंपनी मैकेनिक से संपर्क कर तुरंत उसका डिफॉल्ट पासवर्ड बदलें और एक मजबूत पासवर्ड सेट करें। अगर गाड़ी अचानक बंद होती है, तो किसी राह चलते अनजान व्यक्ति को पैसे न दें, बल्कि अधिकृत सर्विस सेंटर से ही संपर्क करें। यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति मदद के बहाने पैसे की मांग करे, तो तुरंत डायल 100/112 या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचित करें।