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वॉट्सऐप के नए 'यूज़रनेम' फ़ीचर की जांच करेगी केंद्र सरकार; सायबर फ्रॉड और पहचान चोरी होने का बढ़ा बड़ा ख़तरा


नई दिल्ली: देश के सबसे लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप (WhatsApp) के नए और बहुप्रतीक्षित 'यूज़रनेम' (Username) फ़ीचर पर अब केंद्र सरकार की पैनी नजर है। पीटीआई (PTI) न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार इस नए फ़ीचर की गहनता से सुरक्षा जांच (Scrutiny) करने जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस फ़ीचर के आने से पहचान छिपाकर की जाने वाली धोखाधड़ी (Identity Theft) और सायबर फ्रॉड का ख़तरा देश में काफ़ी हद तक बढ़ सकता है। भारत में वॉट्सऐप के 50 करोड़ से भी ज़्यादा एक्टिव यूज़र्स हैं, ऐसे में इस विशाल यूज़र बेस की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार इसके सिक्योरिटी स्टैंडर्ड की बारीकी से जांच करना चाहती है।

दरअसल, वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) ने अपने यूज़र्स के लिए बिना मोबाइल नंबर उजागर किए चैट करने की सुविधा देने वाला यह फ़ीचर पेश किया है। इसके तहत यूज़र्स सिर्फ़ एक यूज़रनेम के ज़रिए नए लोगों से कनेक्ट हो सकते हैं और उन्हें अपना पर्सनल फोन नंबर देने की ज़रूरत नहीं होगी।

सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि फोन नंबर छिप जाने से सायबर ठगों और जालसाजों को किसी दूसरे के नाम से फ़ेक प्रोफ़ाइल (बनावट खाता) बनाने में आसानी होगी। इससे आम लोगों को झांसे में लेकर ठगी करना और भी आसान हो सकता है, जिसकी वजह से सरकार इसके सुरक्षा मानकों को लेकर बेहद सतर्क है।

ग़ौरतलब है कि वॉट्सऐप ने ठीक तीन दिन पहले, यानी 29 जून को वैश्विक स्तर पर यूज़रनेम रजिस्ट्रेशन की शुरुआत की है। हालांकि, यह फ़ीचर सभी यूज़र्स के लिए एक साथ लाइव नहीं होगा, बल्कि आने वाले कुछ महीनों में इसे चरणबद्ध (टप्प्याटप्प्याने) तरीक़े से सभी देशों में रोलआउट किया जाएगा। इस नए फ़ीचर के आने के बाद बड़ी ग्रुप चैट्स में या किसी नए व्यक्ति को पहली बार मैसेज करते समय आपका फोन नंबर अपने आप छिप जाएगा और वह तभी दिखेगा जब आप ख़ुद उसे शेयर करना चाहेंगे।

इस बीच, वॉट्सऐप के प्रमुख कुणाल शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यूज़र्स को सलाह देते हुए लिखा है कि सही समय ही सब कुछ है; दुनिया भर में यह फ़ीचर पूरी तरह शुरू होने से पहले ही वॉट्सऐप से जुड़कर अपना मनपसंद यूज़रनेम सुरक्षित (Book) कर लें, क्योंकि करोड़ों यूज़र्स होने के कारण बाद में पसंदीदा नाम मिलना मुश्किल हो सकता है।