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कपास बीज की बिक्री को लेकर राज्यव्यापी असमंजस की स्थिति, 1 जून के बाद बिक्री के आदेश


अमरावती: राज्य में कपास के बीज की बिक्री के अनुरूप समय-समय पर निर्णय बदले जाते रहे हैं। कृषि आयुक्तालय ने लगातार दो वर्षों तक बॉलवर्म की रोकथाम के लिए 1 जून से कपास के बीज की बिक्री का आदेश दिया था। हालांकि इस वर्ष ऐसा कोई आधिकारिक पत्र नहीं आया है, लेकिन कृषि विक्रेताओं को मौखिक निर्देश दिये गये हैं। चर्चा है कि बाहर से आने वाले अप्रमाणित बीजों को कम करने के लिए इस वर्ष बीज बिक्री पर रोक का कोई आदेश नहीं है। इसलिए कपास के बीज की बिक्री को लेकर विक्रेताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 

2017 में बॉलवर्म का बड़े पैमाने पर प्रकोप हुआ था. किसानों को खड़ी फसल पर हल चलाना पड़ा। किसान सूंडियों से त्रस्त थे। तब से, बॉलवर्म के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न तरीके अपनाए गए हैं। 2018 के बाद से, उपचारात्मक उपायों के कारण, बॉलवर्म की घटना न्यूनतम हो गई है। इस कीट के प्रकोप की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए निवारक उपाय किए गए। कृषि विभाग ने बॉलवॉर्म के जीवन चक्र को तोड़ने के लिए सीजन से पहले कपास की बुआई न करने का आग्रह किया था। इसके बाद भी सीजन की समय से पहले बुआई की जा रही थी, इस वजह से किसानों को 1 जून के बाद ही कपास के बीज बेचने की शर्त दी गई थी।

यह है कारण

राज्य में इस स्थिति के चलते, किसानों की पड़ोसी राज्यों से गैर-अनुमोदित कपास के बीज की मांग बढ़ गई। कई किसानों ने इनकी बुआई कर दी थी। इस पर अंकुश लगाने के लिए इस साल कपास बीज की बिक्री की शर्तों में ढील दिए जाने की संभावना है। इसीलिए अभी तक कपास बीज की बिक्री को लेकर विक्रेताओं को कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं।

पिछले साल जैसी स्थिति

राज्य भर में कपास की खेती का क्षेत्र बड़ा है। सरकार ने खरीफ सीजन के लिए बीज पैकेट की मंजूरी दे दी है। इसके मुताबिक निजी बीज उत्पादक कंपनियों से वितरकों तक बीज की डिलीवरी शुरू हो गई है। कपास पर बॉलवॉर्म को नियंत्रित करने के लिए सीजन से पहले कपास की बुआई से बचने के लिए खुदरा विक्रेताओं को 1 जून के बाद कपास के बीज बेचने का आदेश दिया गया है। पिछले साल इस संबंध में कोई आदेश नहीं आया था। इस साल भी यही स्थिति है।