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लखनऊ में गिरी बहुमंजिला इमारत : एक महिला की मौत, जांच समिति गठित


लखनऊ: राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में मंगलवार शाम ढही एक बहुमंजिला इमारत के मलबे में दबी एक बुजुर्ग महिला की बुधवार को इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।   प्रदेश के पुलिस महानिदेशक डी. एस. चौहान ने संवाददाताओं को बताया कि मलबे से आज सुबह निकाली गई बेगम हैदर (87) को अस्पताल पहुंचाया गया था जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि उन्हें अंदरूनी चोटें आई थीं।   

उन्होंने बताया "अभी हादसे में एक ही मौत होने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा हमें दो और व्यक्तियों के बारे में पता चला है। उनकी पहचान अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन एक बैंक के कर्मचारी दुर्घटनाग्रस्त इमारत में किसी ग्राहक के यहां काम से आए थे और उनके साथ में एक और व्यक्ति था। उनको भी हम लोग पता कर रहे हैं ।''   

चौहान ने बताया कि मलबे में अभी एक महिला फंसी है। ‘‘उससे बचाव दल का संपर्क हुआ है। उसे बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है। एक अन्य महिला के भी मलबे में फंसे होने की सूचना है उसे भी निकालने का प्रयास किया जा रहा है। बचाव कार्य लगातार जारी है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 12-12 कंपनियां बचाव कार्य में लगी हैं। इसके अलावा पीएसी की चार कंपनियां भी तैनात की गई हैं।'' उन्होंने बताया कि मलबा कई परतों में है इसलिए बचाव कार्य में मुश्किल हो रही हैं। यह बचाव अभियान 18 घंटे से अधिक समय तक चलने की संभावना है।   

पुलिस महानिदेशक ने बताया कि इमारत ढहने के मामले में मुकदमा तैयार किया जा रहा है। अभी तक आधिकारिक रूप से किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।  उन्होंने बताया "इमारत किन कारणों से गिरी, यह विशेषज्ञों की जांच के बाद ही पता चलेगा। कोई कह रहा है कि बिल्डिंग के नीचे ड्रिलिंग का काम हो रहा था। कोई कह रहा था कि भूकंप का भी परिणाम हो सकता है। यह सारे कयास हैं। जब जांच होगी तब पता चलेगा कि बिल्डिंग कैसे गिरी लेकिन प्रथम दृष्टया दिख रहा है कि इमारत का निर्माण बहुत घटिया सामग्री से किया गया था। इमारत गिरने का एक यह कारण हो सकता है।"   

पुलिस महानिदेशक ने बताया कि वर्ष 2009 में इस इमारत की दो मंजिलें बनाई गई थीं मगर इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण से अनुमति नहीं मिली थी। उसके बाद तीन मंजिलें और बना दी गईं।   मलबे से अब तक 15 लोगों को निकाला जा चुका है। उनमें से 10 का इस समय अस्पताल में इलाज किया जा रहा है जबकि चार अन्य को छुट्टी दे दी गई है।    इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बुधवार को मंडलायुक्त की अगुवाई में तीन सदस्यीय जाँच समिति गठित की गई।     

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तीन सदस्यीय जाँच समिति गठित की गई है। लखनऊ की मंडलायुक्त रोशन जैकब की अगुवाई वाली इस समिति में लखनऊ के संयुक्त पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया तथा लोक निर्माण विभाग लखनऊ के मुख्य अभियंता भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि यह समिति इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार लोगों को चिन्हित कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देगी। पिछले करीब 15 घंटे से जारी बचाव अभियान के दौरान इमारत के मलबे से अब तक 15 लोगों को निकाला जा चुका है।     

इस बीच, प्रशासन ने अलाया अपार्टमेंट के बिल्डर और भवन मालिकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। मंडलायुक्त रोशन जैकब ने बुधवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हजरतगंज की वजीर हसन रोड पर बनाए गए अलाया अपार्टमेंट के ढहने के मामले में उसके भवन मालिक मोहम्मद तारीफ, नवाजिश और शाहिद के साथ-साथ अपार्टमेंट के बिल्डर यजदान पर मुकदमा दर्ज कराया जाए।    मंडलायुक्त ने यह भी आदेश दिए हैं कि लखनऊ शहर में यजदान बिल्डर द्वारा बनवाई गई अन्य इमारतों का चिह्नांकन कर जांच की जाए और अवैध निर्माण या खराब गुणवत्ता वाले निर्माण की स्थिति में तत्काल ध्वस्तीकरण कराया जाए।  

लखनऊ के जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने कहा कि मामले की जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।  गंगवार ने बुधवार को संवाददाताओं को बताया कि मंगलवार शाम को ढहे 'अलाया अपार्टमेंट' के मलबे से अब तक 14 लोगों को निकाला जा चुका है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनमें से 10 की हालत स्थिर मगर खतरे से बाहर है जबकि चार को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि मलबे में अभी तीन और लोगों के दबे होने की आशंका है। उनमें से एक की तरफ से प्रतिक्रिया मिल रही है जबकि बाकी दो लोग कहां दबे हैं, इसका पता लगाया जा रहा है।     

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के मुताबिक, इस चार मंजिला इमारत में 12 फ्लैट थे जिनमें से नौ में लोग रह रहे थे।    गौरतलब है कि लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में वजीर हसन मार्ग पर मंगलवार शाम करीब सात बजे एक बहुमंजिला इमारत ढह गई। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पिछले करीब 16 घंटे से बचाव अभियान चला रही हैं।