सुनेत्रा पवार ने बारामती से नामांकन किया दाखिल, स्व. अजित पवार को श्रद्धांजलि देते हुई भावुक, कहा- उनकी आखिरी सांस बारामती की मिट्टी में ही थमी
पुणे: उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सोमवार को बारामती विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तमाम बड़े नेता और पवार के दोनों पुत्र पार्थ और जय मौजूद रहे। नामांकन दाखिल करने से पहले आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में स्वर्गीय अजित पवार को याद करते हुए सुनेत्रा पवार भावुक हो गई। पवार ने कहा, "बारामती अजित पवार की सांसों में बसती थी। इसलिए उनका अंतिम समय भी बारामती की मिट्टी में ही बीता। यहां के हर पेड़, फूल, पत्ते, सड़क, स्कूल और इमारतों से उनका जुड़ाव था। इसलिए आज ये सभी चीजें उनकी याद में जैसे रो रही हैं। लेकिन मैंने अपना दुख भीतर ही दबाकर रखा और पूरे धैर्य के साथ आप सभी के लिए बाहर आई हूँ।
सुनेत्रा पवार ने कहा कि केवल दो महीने पहले ही हम सभी ने अपने प्रिय नेता आदरणीय दादा को खो दिया। आज उसी पृष्ठभूमि में बारामती विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हो रहा है। मैं आज नामांकन दाखिल कर रही हूं। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बारामती में ऐसा उपचुनाव होगा। मुझे आज भी विश्वास नहीं होता कि दादा हमारे बीच नहीं हैं। मैं इसे मान भी नहीं पा रही हूं। लेकिन नियति ने यह समय हम सब पर लाया है। दादा का जाना केवल मेरा और मेरे परिवार का निजी नुकसान नहीं है, बल्कि बारामती, महाराष्ट्र और देश का भी नुकसान है।"
उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा, "आज हर पत्ता और फूल दादा की याद में रो रहा है। दादा के लिए बारामती मां के समान थी। बारामती का हर कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि हर नागरिक दादा के लिए भगवान के समान था। बारामती की सेवा को ही वे भगवान की सेवा मानते थे। बारामती ही दादा की सांस थी। इसलिए उनका अंतिम समय भी बारामती की मिट्टी में ही बीता। बारामती के हर पेड़, फूल, पत्ते, सड़क, स्कूल, नदी और इमारतों में दादा का स्पर्श है। वे निर्जीव इमारतें, वह न बोलने वाला पानी और फूल भी आज दादा की याद में रो रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "मैंने अपना दुख भी भीतर ही दबा लिया। बारामती के विकास के लिए दादा के सपनों को पूरा करने हेतु मैंने अपना दुख भी दिल में दबाकर रखा और पूरे साहस के साथ आप सभी के सामने आई। लेकिन मुझे यह हिम्मत आप बारामतीवासियों को देखकर ही मिली है। आपका प्यार, आपका समर्थन और आपका साथ ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है, यह मैं विनम्रता से स्वीकार करती हूं। पिछले 35-36 वर्षों में आप सभी ने अजित पवार को भारी मतों से जिताया। दादा के प्रति समर्पण के कारण हर बारामतीवासी खुद को उम्मीदवार मानकर चुनाव में जुट जाता था। इसी वजह से दादा ने हर बार अपने ही मताधिक्य के रिकॉर्ड तोड़े।"
यह दादा को श्रद्धांजलि देने का अवसर
सुनेत्रा पवार ने आगे कहा कि,"वे कहते थे कि आपके वोट का भार मेरे ऊपर है, इसलिए मैं 24 घंटे काम करता हूं। उनके जाने के बाद यह पहली ही चुनाव है। इसलिए यह केवल चुनाव नहीं, बल्कि दादा को श्रद्धांजलि देने का हर बारामतीवासी को मिला अवसर है। शरद पवार साहब ने बारामती को विकास की दिशा दी। उस पर दादा ने अपनी मेहनत से रंग भरे, उसे संवारा, विकसित किया और वैश्विक स्तर तक पहुंचाया। मैं वचन देती हूं कि बारामती की प्रतिष्ठा में कोई कमी नहीं आने दूंगी। बारामती को दुनिया का सबसे विकसित और प्रगतिशील तालुका बनाना दादा का केवल सपना नहीं, बल्कि उनका जुनून था, उनका लक्ष्य था।"
उन्होंने आगे कहा, "दादा बारामती को एक विश्वस्तरीय शहर बनाना चाहते थे। यह सपना पूरा होने के कगार पर ही था कि नियति ने उन्हें हमसे छीन लिया। वे केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि एक विचार थे, एक व्यवस्था थे, जनकल्याण के प्रति समर्पण थे। जब तक जीवन रहा, उन्होंने बारामती की सेवा की और अपने शब्दों को अंत तक निभाया। उनकी जगह कोई नहीं ले सकता, यह सब जानते हैं। उनके विकास के विचारों को आगे बढ़ाने का मैंने संकल्प लिया है।"
अजित दादा का एक भी शब्द अधूरा नहीं रहने दूंगी
सुनेत्रा पवार ने आगे कहा कि, "अजित दादा अपने शब्द के पक्के थे। उनका एक भी वचन अधूरा नहीं रहने दूंगी। उन्हें साक्षी मानकर मैं यह वादा करती हूं कि मेरे लिए केवल पार्थ और जय ही मेरा परिवार नहीं हैं, बल्कि पूरा बारामती मेरा परिवार है। हर बारामतीवासी मेरे परिवार का सदस्य है। इस परिवार के विकास के लिए मैं जीवनभर काम करती रहूंगी। दादा के अचानक जाने से कई कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है, लेकिन चिंता मत कीजिए, मैं किसी भी कार्यकर्ता को अकेला नहीं छोड़ूंगी। दादा का जनता दरबार आगे भी उसी तरह चलता रहेगा। लोगों के काम होना ही दादा को सच्ची श्रद्धांजलि है।"
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