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बदलापुर की घटना के बाद फिर चर्चा में आया "शक्ति लॉ", विपक्ष कर रहा लागू करन की मांग; जानें क्या है कानून


नागपुर: बदलापुर (Badlapur) में दो नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार करने का मामला सामने आया है। घटना को लेकर मुंबई (Mumbai) से नागपुर (Nagpur) तक रोष का माहौल है। बदलापुर में जनता सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रही है और आरोपी को फांसी देने की मांग कर रहे हैं। वहीं इस मामले को लेकर विपक्ष राज्य सरकार पर हमलावर है। विपक्ष राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) पर निशाना साध रही है। इसी बीच राज्य में शक्ति कानून (Shakti Law) की चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी लगातार इस कानून को लागू करने की मांग कर रहे हैं। 

क्या है शक्ति कानून?

दिल्ली में हुए निर्भया के बाद भी महाराष्ट्र सहित देश में महिलाओं को लेकर होने वाली घटना में कमी के बजाय बढ़ोतरी देखी गई। जिसको देखते हुए तत्कालीन महाविकास अघाड़ी ने महिलाओं की सुरक्षा और जल्दी न्याय मिलने को लेकर शक्ति कानून लाया था। इस कानून का मुख्य मकसद राज्य की आधी आबादी को सुरक्षित और उनसे संबंधित अपराधों में कमी लाना था। इस कानून में हिंसा, एसिड अटैक और बलात्कार जैसे गैर-जमानती अपराध, सोशल मीडिया पर महिलाओं को लेकर होने वाली हेट स्पीच, ईमेल-मैसेज पर महिलाओं की मानहानि या उत्पीड़न के मामलों को शामिल किया था। कानून में 21 दिनों के अंदर आरोप पत्र दाखिल करने की बात कही थी। 

  • बलात्कार के मामले में अपराधी को मृत्युदंड या कठोर कारावास से दंडित करने का प्रावधान इस अधिनियम में किया गया है।
  • अपराध दर्ज होने के 30 दिन के भीतर जांच पूरी होनी चाहिए. यदि 30 दिनों के भीतर जांच संभव नहीं है, तो पुलिस महानिरीक्षक या पुलिस आयुक्त को 30 दिनों तक का विस्तार मिलेगा।
  • यौन अपराध के मामले में न्यायिक जांच 30 दिन के भीतर पूरी होगी। 
  • इंटरनेट या मोबाइल टेलीफोन डेटा प्रदाता को पुलिस जांच के लिए जानकारी प्रदान करने में चूक के लिए तीन महीने तक की कैद या 25 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा
  • फोन और अन्य डिजिटल माध्यमों से महिलाओं को धमकी देने पर सजा दी जाएगी। यह सज़ा किसी पुरुष, महिला या किसी तीसरे पक्ष को दी जा सकती है।
  • यौन अपराध की झूठी शिकायत करने या जानबूझकर किसी व्यक्ति को परेशान करने पर भी जमानत नहीं मिलेगी।
  • एसिड हमला करने वाले अपराधी को 15 साल की कैद या आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। आर्थिक दंड का भी प्रावधान किया जाएगा। इस कानून में एसिड हमले के कारण संबंधित महिला के इलाज और प्लास्टिक सर्जरी का खर्च भी इस जुर्माने से कवर करने का प्रावधान किया गया है।