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Nagpur

Assembly Election 2024: नाना पटोले के गढ़ में किसकी हवा, भाजपा वापस पाएगी अपनी सीट या कांग्रेस रखेगी बरकरार


भंडारा: साकोली विधनसभा सीट (Sakoli Assembly Constituency) राज्य की हॉट और हेवीवेट विधानसभा सीटों में से एक है। कांग्रेस (Congress) के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले (Nana Patole) इस सीट से विधायक है। वहीं आगामी विधानसभा चुनाव में वह एक बार फिर इसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। वर्तमान में पटोले राज्य में सबसे बड़े नेताओ में एक हैं, इस कारण विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) उनके टक्कर देने के लिए अपनी एड़ी चोटी का जोर लगाने वाली है। जानतें हैं क्या है विधानसभा की स्थिति। क्या भाजपा फिर वापस पायेगी अपनी सीट या पटोले रखेंगे बरक़रार।

साकोली सीट आम तौर पर किसी भी दल का गढ़ नहीं रही। यहाँ पहले जनसंघ -भाजपा और कांग्रेस लगभग बराबर में रही हैं। नाना पटोले यहाँ से दो बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। 2009 में वह भाजपा की टिकट पर चुनाव जीते थे, वहीं 2019 में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा के सदस्य बने। उन्होंने भाजपा के परिणय फुके को हराया था। पटोले को 95,208 यानी कुल मतदान का 41.63 प्रतिशत वोट मिला था, वहीं फुके को 88,968 वोटों से संतोष करना पड़ा था। 

जानतें हैं साकोली विधानसभा सीट का इतिहास 

1962 में पहली बार इस सीट का गठन किया गया। वर्तमान में तीन तहसीलों को मिलाकर विधानसभा बनाई गई है। पहले चुनाव में जहां यहाँ कांग्रेस उम्मीदवार को जीत मिली थी। वहीं अगले चुनाव में भारतीय जनसंघ (Bhartiya Jansangh) का उम्मीदवार जीता था। इस सीट पर अब तक 13 बार चुनाव हुए हैं, जिसमें आठ बार कांग्रेस (Congress) और पांच बार भाजपा (BJP) या जनसंघ के उम्मीदवार को जीत मिली है। सबसे महत्वपूर्ण नाना पटोले एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस से चुनाव जीत चुके हैं।

विधानसभा की जातीय समीकरण 
साकोली में कुल 226,671 वोटर हैं। उनमें से 160,909 पुरुष वोटर हैं। महिला मतदाताओं की संख्या 157,484 हैं। थर्ड जेंडर के मतदाता 0 हैं। 2019 में कुल वोटरों की संख्या 226,671 थी। अगर जातियां समीकरण की बात करें तो 2011 के अनुसार, यहां 83 प्रतिशत हिन्दू और 17 प्रतिशत अन्य धर्मो के निवासी है। विधानसभा में अनुसचित जाती के वोटरों की संख्या करीब 22 प्रतिशत है। अनुसूचित जनजाति के वोटर भी यहां ठीक-ठाक स्थिति में हैं। वहीं मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी लगभग तीन प्रतिशत के आस - पास हैं। 

विधानसभा सीट के प्रमुख मुद्दे 

साकोली ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है। यहाँ की 80 प्रतिशत जनसख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। यहाँ के मुद्दों की बात करें तो स्वास्थ्य, सड़क प्रमुख मुद्दों में से एक है। इसी के साथ साकोली में प्रस्तावित भेल प्लांट भी यहाँ एक बड़ा मुद्दा है। यूपीए सरकार में प्रत्सावित यह प्रोजेक्ट अभी तक यहाँ लग नहीं पाया है। जिसके कारण यहां के मतदाताओं में यह एक बड़ा मुद्दा है। इसी के साथ रोजगार भी यहाँ एक मुद्दा है। 

नाना की वापसी या बदलाव के संकेत 

2019 में नाना पटोले ने भाजपा के परिणय फुके को छह हजार वोटों से हराया था। नाना की पारंपरिक सीट होने के बावजूद साकोली में उन्हें कड़ी टक्कर मिली थी। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. प्रशांत पडोले साकोली से भाजपा उम्मीदवार सुनील मेंढे से बेहद कम वोटों  से आगे रहे थे। दोनों चुनावो और मौजूदा स्थिति को देखें तो नाना पटोले के लिए अनुकूल है, लेकिन आसान नहीं है। बीते तीन सालों से वह महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, जिसके कारण विधानसभा क्षेत्र में उनकी मौजूदगी बेहद कम रही। इसी के साथ भाजपा के मजबूत संगठन के सामने कांग्रेस का संगठन कमजोर नजर आ रहा है। साथ ही कुछ अन्य वजह भी हैं जिसको देखते नाना को आगामी चुनाव में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है।