logo_banner
Breaking
  • ⁕ केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर, मुख्यमंत्री फडणवीस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुए सहभागी ⁕
  • ⁕ गढ़चिरोली में 11 बड़े माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, माओवादिओं पर 68 लाख रुपये के थे इनाम ⁕
  • ⁕ Buldhana: कई हिस्सों में बेमौसम बारिश, तेज हवाओं के साथ कई जगह गिरे ओले, आम, केला, अंगूर के बागों को नुकसान ⁕
  • ⁕ Gadchiroli: अतिदुर्गम बंगाडी में केवल 24 घंटे में स्थापित किया गया नया पुलिस सहायता केंद्र ⁕
  • ⁕ सोलर ग्रुप ने पिनाका एक्सटेंडेड रेंज रॉकेट का किया पहला सफल परीक्षण, 45 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले 24 रॉकेटों का परीक्षण ⁕
  • ⁕ Nagpur: एमआईडीसी में पिस्टल की नोक पर बार में लूट, कुख्यात अजीत सातपुते गैंग सहित 6 गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ मराठी भाषा नहीं पढ़ना स्कूलों को पड़ेगा भारी, ऐसे स्कूलों की मान्यता होगी रद्द; मंत्री दादा भूसे का ऐलान ⁕
  • ⁕ Ramtek: नवरगांव स्थित टूरिस्ट ढ़ाबा के कुक की छह माह बाद मिली लाश, पुलिस ने ढ़ाबे के 4 कर्मचारियों को किया गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ Wardha: आपूर्ति विभाग की बड़ी कार्रवाई, हजारों टन अवैध गेहूं-चावल जब्त, बजरंग दल की सतर्कता से गोदाम सील ⁕
  • ⁕ Amravati: वलगाव में खेत में किसान के साथ अज्ञात लोगों ने की मारपीट, डॉक्टरों की लापरवाही से किसान की मौत होने का आरोप ⁕
Amravati

अंग्रेजी पूर्ण ज्ञान नहीं है, बल्कि यह सिर्फ एक भाषा, अमरावती विश्वविद्यालय के 41वें दीक्षांत समारोह में बोल राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन


अमरावती: हर भाषा की अपनी अलग विशेषताएं होती हैं। अपनी मातृभाषा पर गर्व करना गलत नहीं है। लेकिन, इससे यह ग़लतफ़हमी पैदा होती है कि हम अन्य भाषाओं से नफरत करते हैं। संस्कृत, पाली, अंग्रेजी, हिंदी और देश की अन्य भाषाओं के साहित्य का मातृभाषाओं में अनुवाद किया जाना चाहिए। किसी भी भाषा से नफरत करने की कोई जरूरत नहीं है। महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने रविवार को यहां कहा कि अंग्रेजी पूर्ण ज्ञान नहीं है, बल्कि यह सिर्फ एक भाषा है।

वह संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय के 41वें दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति भूषण गवई, कुलपति डॉ. मिलिंद बाराहाटे और अन्य उपस्थित थे। राज्यपाल ने कहा, "यह मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य का क्षण है कि राज्यपाल के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है।" तमिल को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाने के लिए एक महान संघर्ष की आवश्यकता थी।

यह हमारे लिए अत्यंत खुशी का क्षण था जब स्वर्गीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान तमिल को अंततः शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त हुआ। इसकी तुलना में मराठी ने यह दर्जा आसानी से हासिल कर लिया। राज्यपाल ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने सरकारी कामकाज के लिए मराठी भाषा का प्रयोग किया, जिससे इसे शाही दर्जा प्राप्त हुआ। संत ज्ञानेश्वर, संत नामदेव, संत तुकाराम, संत जनाबाई, संत गाडगे बाबा और राष्ट्रसंत तुकादोजी महाराज ने मराठी भाषा में व्यापक रूप से लेखन और प्रचार किया।

अन्य भाषाओं के साथ-साथ हमें शास्त्रीय भाषा मराठी की विभिन्न बोलियों का अध्ययन और संरक्षण करना चाहिए। संस्कृत, पाली, अंग्रेजी, हिंदी और भारत की अन्य शास्त्रीय भाषाओं में संग्रहीत ज्ञान का मराठी में अनुवाद किया जाना चाहिए, ताकि आम आदमी इसका लाभ उठा सके।

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में पारंपरिक पाठ्यक्रमों के अलावा, हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसे उन्नत क्षेत्रों में शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए।

पाठ्यक्रमों को इस प्रकार डिजाइन किया जाना चाहिए कि वे उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। शिक्षा को न केवल छात्रों को रोजगार योग्य बनाना चाहिए, बल्कि उनमें काम और जीवन के प्रति सही दृष्टिकोण भी पैदा करना चाहिए। तभी सामाजिक खुशहाली में वृद्धि के माध्यम से राष्ट्र का विकास संभव हो सकेगा। हमें विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी करने का प्रयास करना चाहिए ताकि छात्रों के लिए बाजार की मांग के अनुरूप नवीन कार्यक्रम उपलब्ध कराए जा सकें।