विधानसभा में महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक पेश, मुख्यमंत्री बोले- किसी धर्म के विरोध में नहीं; UBT का समर्थन, Congress और SP ने किया विरोध
मुंबई: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के महत्वकांशी महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 को विधानसभा में पेश किया। इस दौरान बोलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि, यह बिल लाते समय, यह किसी धर्म के लिए या किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। यह सभी धर्मों के लिए है। कई बार, राज्य में धर्म परिवर्तन की घटनाओं से कानून और व्यवस्था की स्थिति खराब हो जाती है। हमारे पास जो कानून हैं, उनमें इसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोई साफ नियम नहीं हैं। वहीं इस विधेयक का कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने जोरदार विरोध किया और इसे मुस्लोमों को टारगेट करने वाला बताया। हालांकि, उद्धव ठाकरे की अगवाई वाली शिवसेना ने बिल का समर्थन किया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। लेकिन इस अधिकार का उपयोग करते समय कुछ प्रतिबंध भी लागू होते हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, परंतु यह अधिकार कुछ परिस्थितियों और नियमों के अधीन है। इसी कारण सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णयों में जबरन धर्मांतरण का विरोध किया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। लेकिन इस अधिकार का उपयोग करते समय कुछ प्रतिबंध भी लागू होते हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, परंतु यह अधिकार कुछ परिस्थितियों और नियमों के अधीन है। इसी कारण सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णयों में जबरन धर्मांतरण का विरोध किया है।
विभिन्न राज्यों ने वर्ष 1968 से इस संबंध में कानून बनाए हैं। जैसा कि स्पष्ट किया गया है, यदि कोई कानून जबरन धर्मांतरण के खिलाफ है तो वह संवैधानिक रूप से वैध माना जाएगा। यह विधेयक नागरिकों को जबरदस्ती, धोखाधड़ी या अवैध धर्मांतरण से बचाने के लिए लाया गया है। इसका उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा और धर्म की स्वतंत्रता की रक्षा करना है। इस कानून के तहत लालच, प्रलोभन, धोखाधड़ी, छल, नाबालिगों को प्रभावित करना या अनुचित दबाव डालकर किया गया धर्मांतरण अवैध माना जाएगा।
आगे बोलते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस प्रकार के धर्मांतरण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कई बार अवैध धर्मांतरण कर विवाह किया जाता है और बाद में वह विवाह टूट जाता है। ऐसी स्थिति में कानून के तहत यदि विवाह केवल अवैध धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया हो, तो उसे अदालत द्वारा शून्य और निरर्थक घोषित किया जा सकेगा।
इसके अलावा यदि अवैध धर्मांतरण के कारण किसी बच्चे का जन्म होता है, तो उस बच्चे का धर्म मां के पूर्व धर्म के आधार पर माना जाएगा। हालांकि, उस बच्चे को माता-पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार बना रहेगा। साथ ही बच्चे की कस्टडी मां के पास ही रहेगी।
उद्धव गुट ने किया समर्थन
विधेयक का उद्धव गुट ने समर्थन किया। भास्कर जाधव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने धर्मांतरण से जुड़े विधेयक को सदन में पेश करते हुए उसका पूरा सार प्रस्तुत किया। लेकिन अंत में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी एक विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सर्वसमावेशी विधेयक है।" आगे बोलते हुए भास्कर जाधव ने कहा कि, "मुख्यमंत्री ने इस विधेयक को कई बार पढ़ा है और इसमें किसी भी धर्म का कहीं उल्लेख नहीं किया गया है। इसी आधार पर जाधव ने इस विधेयक को अपना समर्थन भी दिया।"
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का विरोध
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का विरोध
महाविकास अघाड़ी में शामिल उद्धव गुट ने भले समर्थन किया। वहीं कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे मुस्लिमो के खिलाफ बताते हुए इसका जोरदार विरोध किया और इसे समिति के पास भेजने की मांग की। अस्लम शेख ने महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य विधेयक का विरोध किया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करने का निर्णय लेता है और इसके लिए नोटिस देता है, तो उसे सुरक्षा कौन प्रदान करेगा?
अस्लम शेख ने कहा कि यह विधेयक एक विशेष धर्म के खिलाफ लाया गया कानून प्रतीत होता है। वहीं सपा के रईस शेख ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि, "भास्कर जाधव ने स्वयं माना कि इस विधेयक में कुछ त्रुटियां हैं, इसके बावजूद उन्होंने इसका समर्थन किया।" रईस शेख ने स्पष्ट कहा कि वे इस विधेयक का विरोध करते हैं, क्योंकि उनके अनुसार यह कानून एक खास समुदाय के खिलाफ लाया गया बिल है।
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