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Amravati

Amravati: अमरावती विभाग की बसों की हालत ख़राब; 361 मेसे केवल 50 प्रतिशत चलने योग्य


अमरावती: एसटी बसों को राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की लाइफलाइन मानी जताई है। रोजाना हजारों लोग एसटी बसों का इस्तेमाल अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए करते हैं। हालांकि, करोडो रुपये कमाने के बाद भी रखरखाव नहीं होने कारण बसों की हालत बिगड़ती जा रही है। अमरावती विभाग में एसटी की 361 का कोटा है, लेकिन उसमें 50 प्रतिशत बसों की स्थित बेहद ख़राब है। चलते चलते बीच सड़क पर वह कभी भी बंद हो जाती हैं। वहीं नई बसे नहीं मिलने के कारण यात्रियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। 

जिले के आठ बस स्टेशन अमरावती, बडनेरा, परतवाड़ा, वरूड, चांदूर रेलवे, दर्यापुर, मोर्शी और चांदूर बाजार में कुल 361 बसें हैं। लेकिन, इनमें से 40 बसें पूरी तरह बंद पड़ी हैं। इसमें 15 बसें इंजन खराब होने के कारण बंद हैं और 4 बसें दुर्घटनाग्रस्त हैं। इसके अलावा 12 बसें अन्य कारणों से बंद पड़ी हैं। अमरावती विभाग में पिछले दो साल में 74 एसटी बसें ख़राब हो चुकी  हैं। उसके बाद भी निगम ने नई बसे उपलब्ध नहीं कराई। 

13 साल पुरानी बस स्क्रैप में जाएंगी

यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए एसटी महामंडल ने बसों की स्क्रैप के लिए नियम बनाएं हैं। इसके तहत अगर कोई बस 10 साल पुरानी हो चुकी है या 16 लाख किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी है उसे स्क्रैप के लिए भेज दिया जाता है, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान दो साल बसें नहीं चली। इसके कारण नियमों में संशोधन कर 13 साल और साढ़े 16 लाख किलोमीटर कर दिया है। 

तीन साल से एक भी नई बस नहीं 

लगातार बसों की ख़राब होने के बावजूद एसटी मंडल द्वारा अमरावती विभाग को एक भी नई बस उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। विभाग को कोरोना के पहले 2019 में 16 नई बसे मिली थी। जिसमें पांच शिवशाही, पांच साधी, चार विठाई और दो स्लीपर कम सीट बसे मिली थी। 

जल्द मिलेगी नई बसें 

विभाग नियंत्रक नीलेश बेलसरे ने इस पर कहा कि, "वर्तमान में 41 बसें विभिन्न कामों के तहत डिपो में खड़ी हुईं है। जिसमें कई के इंजन काम, आरटीओ काम शामिल है। आने वाले साथ-आठ दिनों में अधिकतर बस सड़को पर दौड़ेगी। वहीं नई बसों का सवाल है हमने प्रस्ताव विभाग के पास भेजा है, उम्मीद है जल्द ही हमें नई बसे मिलेंगी। 

आरटीओ के मुताबिक की जाती है जांच 

बेलसरे ने बताया कि, हर साल आरटीयों के नियमों के अनुसार हर महीने बसों की जांच की जाती है। हर महीने 25-26 गाड़ियों की चेकिंग की जाती है और इसका प्रमाणपत्र जारी होने के बाद ही इन्हे सड़क में उतारा जाता है।