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धोखे का डिजिटल जाल! Physics Wallah और McAfee के "डार्क पैटर्न्स" पर एक्शन, CCPA ने लगाया तगड़ा जुर्माना


नई दिल्ली: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं को गुमराह करने और उनके फैसलों को प्रभावित करने वाली चालाकी भरी डिजाइनों यानी 'डार्क पैटर्न्स' (Dark Patterns) के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रमुख एडटेक कंपनी 'फिजिक्स वाला' (PhysicsWallah) पर 5 लाख रुपये और दिग्गज साइबर सुरक्षा कंपनी 'मैकेफी' (McAfee) पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अगुवाई में सीसीपीए ने इन दोनों कंपनियों को अपनी वेबसाइट और मोबाइल एप्लीकेशन से ऐसे भ्रामक तौर-तरीकों को तुरंत हटाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

नियामक संस्था सीसीपीए ने फिजिक्स वाला (PW) के प्लेटफॉर्म पर तीन प्रमुख उल्लंघनों को लेकर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया था। जांच में पाया गया कि जब छात्र किसी कोर्स को खरीदने के लिए चेकआउट पेज पर जाते थे, तो उनकी बिना स्पष्ट सहमति के 'पीडब्लू फाउंडेशन' के लिए 10 रुपये की डोनेशन राशि पहले से ही सिलेक्ट (Pre-selected) होकर कुल भुगतान में जुड़ जाती थी। इसे हटाने से रोकने के लिए छात्रों को बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और शादियों से जुड़े भावनात्मक संदेश दिखाकर हतोत्साहित किया जाता था, जिसे उपभोक्ता नियमों में 'बास्केट स्नीकिंग' और 'कन्फर्म शेमिंग' माना गया है।

इसके अलावा, जिन कोर्सेज को 'मुफ़्त' बताकर विज्ञापित किया जा रहा था, उन्हें एक्सेस करने के लिए छात्रों से उनका मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी व्यक्तिगत जानकारी अनिवार्य रूप से मांगी जा रही थी, जिसे 'फोर्स्ड एक्शन' (जबरन कार्रवाई) के तहत नियमों का उल्लंघन पाया गया है क्योंकि यह डेटा कलेक्शन कोर्स के लिए जरूरी नहीं था। चूंकि फिजिक्स वाला के यूजर्स में बड़ी संख्या नाबालिग छात्रों की है, इसलिए प्राधिकरण ने इसे एक बेहद गंभीर सुरक्षा चूक माना।

वहीं दूसरी ओर, साइबर सुरक्षा कंपनी मैकेफी के मामले में सीसीपीए ने पाया कि कंपनी अपने सब्सक्रिप्शन रिन्यूअल (नवीनीकरण) इंटरफेस पर उपभोक्ताओं को सिर्फ दो विकल्प देती थी, जिनमें पहला 'रिन्यू नाउ' (अभी नवीनीकृत करें) और दूसरा 'एक्सेप्ट रिस्क' (जोखिम स्वीकार करें) था। कंपनी ने उपभोक्ताओं के सामने कोई न्यूट्रल या सामान्य विकल्प जैसे 'कैंसिल' या 'स्किप' नहीं रखा था।

इस प्रकार की भाषा का उपयोग करके उपभोक्ताओं को यह डराया जाता था कि यदि वे सब्सक्रिप्शन रिन्यू नहीं करेंगे, तो वे अपनी सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं, जबकि कंपनी इस दावे को न तो सही ठहरा सकती थी और न ही इसकी कोई गारंटी दे सकती थी। साथ ही, रिन्यूअल बटन को स्क्रीन पर ज्यादा बड़ा और चमकदार दिखाया जाता था ताकि उपभोक्ता का ध्यान भटकाया जा सके।

नियामक प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि, यह दंडात्मक कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम 2020 और डार्क पैटर्न्स रोकथाम व विनियमन दिशानिर्देश 2023 के तहत की गई है। सरकार ने नवंबर 2023 में ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर होने वाली ऐसी 13 चालाकी भरी गतिविधियों को 'अनुचित व्यापार व्यवहार' घोषित करते हुए प्रतिबंधित कर दिया था। सीसीपीए ने सभी ई-कॉमर्स और डिजिटल कंपनियों को कड़ी चेतावनी देते हुए हाल ही में एक एडवाइजरी भी जारी की है, जिसमें उन्हें अपने प्लेटफॉर्म का खुद ऑडिट (Self-Audit) करने और उपभोक्ताओं की स्वायत्तता से खिलवाड़ करने वाले इन डार्क पैटर्न्स को तुरंत पूरी तरह से साफ करने को कहा गया है।