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Nagpur

पीएम मोदी ने सोना नहीं खरीदने की अपील: राजेश रोकड़े ने जताई चिंता, कहा- 'सोने की मांग घटी, तो 1 करोड़ नौकरियां खतरे में'


नागपुर: ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के अध्यक्ष राजेश रोकड़े (Rajesh Rokde) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की 'सोना न खरीदने' की अपील पर उद्योग जगत की व्यावहारिक चिंताओं को सामने रखा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि देश में सोने की मांग में बड़ी गिरावट आती है, तो जेम्स एंड ज्वेलरी क्षेत्र से जुड़े 1 करोड़ से अधिक लोगों का रोजगार संकट में पड़ सकता है।

रोजगार पर पड़ेगा सीधा असर
राजेश रोकड़े के अनुसार, इस उद्योग में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक करोड़ से ज्यादा लोग कार्यरत हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं।

  • स्वर्णकार और कुशल कारीगर
  • छोटे आभूषण विक्रेता और रिटेलर्स
  • पॉलिशिंग यूनिट्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के श्रमिक
  • लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कर्मचारी

उन्होंने कहा कि यदि सोने की खरीद पूरी तरह थम जाती है, तो इन लाखों परिवारों के सामने उदरनिर्वाह का गंभीर प्रश्न खड़ा हो जाएगा।

'गोल्ड मोनेटाइजेशन' है बेहतर विकल्प
रोकड़े ने सुझाव दिया कि सरकार को सोने के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 'गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम' (स्वर्ण मौद्रिकरण योजना) को और अधिक प्रभावी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, ""अनुमान है कि भारतीयों के पास लगभग 40,000 से 50,000 टन सोना है। यदि इस घरेलू सोने का केवल 10-20 प्रतिशत हिस्सा भी चलन में आ जाए, तो भारत को अगले 10 वर्षों तक बाहर से सोना आयात करने की आवश्यकता नहीं होगी।"

संस्कृति बनाम निवेश का तर्क
प्रधानमंत्री ने देश के आर्थिक हित और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के कम उपयोग और एक साल तक सोना न खरीदने का आह्वान किया है। इस पर रोकड़े का कहना है कि ,"भारत में सोना केवल एक निवेश नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। शादी-ब्याह और धार्मिक उत्सवों में सोने की खरीदारी को पूरी तरह रोकना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। प्रधानमंत्री की अपील संभवतः उन लोगों के लिए हो सकती है जो केवल 'शुद्ध निवेश' के उद्देश्य से भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं।

अर्थव्यवस्था पर आयात का बोझ
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातकों में से एक है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है और व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ता है। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि आर्थिक फैसलों के साथ-साथ करोड़ों लोगों की आजीविका का संतुलन बनाना भी आवश्यक है।