logo_banner
Breaking
  • ⁕ नाना पटोले की भाजपा में होगी वापसी! विधायक परिणय फुके ने किया बड़ा दावा; चर्चाओं का बजार हुआ गर्म ⁕
  • ⁕ महाराष्ट्र में जल संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, राज्य के सभी जलस्रोतों का पानी पीने के लिए किया आरक्षित ⁕
  • ⁕ संवैधनिक संस्थाओ के खिलाफ अविश्वास पैदा करना चाहता है विपक्ष, मुख्यमंत्री फडणवीस बोले- देश में वामपंथी शासन लाना चाहते हैं राहुल गांधी ⁕
  • ⁕ देऊळगांव राजा में दो गुटों में खूनी संघर्ष, नगरसेवक समेत दो की मौत; पुलिस स्टेशन के सामने हुआ बवाल ⁕
  • ⁕ मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे में मतभेद! विजय वडेट्टीवार ने किया बड़ा दावा, मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस नेता को दी सधी हुई सलाह ⁕
  • ⁕ त्योहारों पर नागपुर और न्यू अमरावती के यात्रियों को बड़ी राहत, मध्य रेलवे चलाएगा विशेष ट्रेनें ⁕
  • ⁕ Chandrapur: चंद्रपुर का राजा’ गणेश मंडल पर रामनगर पुलिस थाने में FIR ⁕
  • ⁕ Amravati: अमरावती में शिवसेना यूबीटी ने निकाला मार्च, कर्जमाफी सहित 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद देने की मांग ⁕
  • ⁕ Yavatmal: वणी में भीषण सड़क हादसा, बाइक सवार 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत ⁕
  • ⁕ Nagpur: ड्यूटी पूरी कर घर पहुंचे ASI रविंद्र कोकांडे की अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत ⁕
Nagpur

ईरान-अमेरिका युद्ध का केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के परिवार को लगा फटका, बेटे-बहु की कंपनियों को हुआ करोडो का नुकसान


नागपुर: इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुए युद्ध को दो महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। खाड़ी देशों में जारी इस युद्ध का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। एक तरफ जहां ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, वहीं व्यापार जगत को भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) और उनका परिवार भी इस युद्ध के असर से अछूता नहीं रहा है। इस युद्ध के कारण उनके परिवार की कंपनियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। खासकर केंद्रीय मंत्री के बेटे और बहू की कंपनियों को सबसे ज्यादा फटका लगा है। इस बात की जानकारी खुद गडकरी ने दी।

नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में गडकरी ने बताया कि युद्ध के चलते समुद्री परिवहन और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। उनके बेटे के 400 केले के कंटेनर रास्ते में फंसकर खराब हो गए, जबकि ईरान से आने वाले 200 कंटेनर सेब भी सड़ गए।

गडकरी ने यह भी बताया कि उनकी बहू डिटर्जेंट का कारोबार संभालती हैं और हर महीने करीब 100 कंटेनर अमेरिका भेजे जाते थे। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद कंटेनरों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई, जिससे कारोबार को बड़ा झटका लगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस नुकसान के बावजूद उन्होंने स्थानीय बाजार में काम जारी रखा और कारोबार को संभालने की कोशिश की। साथ ही उन्होंने बीमा कंपनियों पर भी नाराजगी जताई और कहा कि भारी नुकसान के बावजूद क्लेम देने में आनाकानी की जा रही है।