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सरकार में शामिल विधायक अदालत को हलके में ले रहे: जयंत पाटिल


गडचिरोली: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस सरकार कब तक चलेगी इसपर अपनी प्रतिकिया दी है। उन्होंने कहा कि, यह नवगठित सरकार कब तक चलेगी यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करता हैं। मंगलवार को गडचिरोली दौरे पर पहुंचने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए यह बात कही।  वहीं शिंदे गुट के विधायक भारत गोगले के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि, बागी विधायक दावा कर रहे हैं कि परिणाम में चार से पांच साल नहीं लगेंगे और ये लोग अब अदालत को हल्के में ले रहे हैं। 

पाटिल ने आगे कहा कि एकनाथ शिंदे गढ़चिरौली के संरक्षक मंत्री थे। लेकिन उन्होंने जिले के विकास के लिए कुछ नहीं किया। इतना ही नहीं यहां बाढ़ से कई गांव तबाह हो गए। नागरिक सड़कों पर उतर आए। ऐसे में शिंदे को उस जिले की तुरंत मदद करनी चाहिए थी, जिसने पहले संरक्षकता स्वीकार कर ली थी। लेकिन उन्हें नई सरकार के साथ तालमेल बिठाने से ही समय नहीं मिल रहा है। घोषित सहायता केवल कागजों पर है। अभी तक किसी भी बाढ़ पीड़ित को कोई मदद नहीं मिली है।"

एनसीपी नेता ने कहा,  वहीं उनके साथी विधायकों को चार-पांच साल तक नतीजे नहीं मिलेंगे. उनका दावा है कि हमारी सरकार को कोई खतरा नहीं है. राज्यपाल हों या जनप्रतिनिधि हों, उन्हें लोकतंत्र के ढांचे के भीतर काम करना चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। उन्होंने यह भी आलोचना की कि सवाल यह है कि क्या अब इस सरकार से कुछ उम्मीद की जाए। 

मेडिगड्डा  है भाजपा का अपना पाप

स्थानीय विरोध के बावजूद मेडिगड्डा जैसे बांध महाराष्ट्र की सीमा पर बनाए गए थे। तत्कालीन भाजपा सरकार ने उन्हें बिना शर्त अनुमति दी थी। इससे गढ़चिरौली जिले में बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं। हमने इस बारे में अधिवेशन में  सवाल भी उठाया था। इस पर भी चर्चा हुई। जयंत पाटिल ने इस बात पर भी खेद व्यक्त किया कि बाढ़ के कारण गांवों और नागरिकों को नष्ट होते देख हमारा दिल आहत होता है, लेकिन शासकों को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है।