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सूरजगढ़ लौह अयस्क परियोजना: 13 गांव पर विस्थापित होने का संकट, नागरिकों में भारी रोष


गढ़चिरोली: विवादास्पद सूरजगढ़ लौह अयस्क परियोजना में विभिन्न कारणों से खनन का क्षेत्र बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। चूंकि यह एटापल्ली तहसील के 13 आदिवासी बहुल गांवों को प्रभावित करेगा, इसलिए उन्हें भविष्य में विस्थापन का खतरा हो सकता है। प्रशासन की शिकायतों को सुनने के लिए 27 अक्टूबर को जनसुनवाई का समय निर्धारित किया गया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस संबंध में एक पत्र जारी किया है, वहीं प्रभावित आदिवासी इसके खिलाफ रोष व्यक्त कर रहे हैं।

सूरजगढ़ लौह खदान में चल रही खुदाई के कारण इस क्षेत्र के नागरिकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वे खराब सड़कों, लगातार ट्रैफिक जाम, धूल और प्रदूषण से परेशान हैं। लॉयड मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड, जो अब खनन अनुबंध रखती है। कंपनी ने खदान से 10 मिलियन टन सामग्री निकालने के लिए अपने मौजूदा 348 हेक्टेयर खनन का विस्तार करने की योजना बनाई है।

हालांकि, इसके कारण उस क्षेत्र में प्रदूषण में भारी वृद्धि होगी और कुल 13 गांव जैसे बंदे, मलमपडी, पारसलगोंडी, सुरजागढ़, हेदरी, मंगेर, इकारा खू, करमपल्ली, पेठा, ज़रेगुडा, कुदरी, नागुलवाड़ी, मोहरली प्रभावित होगी। इसी उद्देश्य से 27 अक्टूबर को गढ़चिरौली जिला कलेक्टर कार्यालय में आपत्ति एवं शिकायतों को लेकर पर्यावरण मुद्दों पर जनसुनवाई की जाएगी। हालांकि इस गांव के आदिवासी नागरिकों ने इस पर अपना गुस्सा जाहिर किया है।

लालच के कारण पर्यावरण को नुकसान

नागरिकों ने कहा, धीरे-धीरे कंपनी इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है। खदानों से अधिक उत्पादन का लालच कभी समृद्ध प्रकृति को प्रदूषण की खाई में धकेल रहा है। भविष्य में हमारे लिए गाँव छोड़ने का समय होगा। नागरिकों ने गुस्से में सवाल पूछा है कि प्रशासन केवल कंपनी के बारे में सोचेगा या हमें बचाएगा। इन सब के बीच चुप रहने को लेकर जनप्रतिनिधियों के खिलाफ इन नागरिकों में गुस्सा भी है।