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Nagpur

महाराष्ट्र के सत्ता संघर्ष की सुनवाई में संवैधानिक पीठ का चुनाव आयोग को निर्देश चुनाव चिन्ह पर तत्काल न ले फैसला


नई दिल्ली- महाराष्ट्र में सत्ता संघर्ष और शिवसेना के अधिपत्य की लड़ाई सर्वोच्च न्यायालय की सबसे अहम न्याय इकाई संवैधानिक पीठ के समक्ष हो रही है.बुधवार को राज्य के लिए अहम केस की 10 मिनट की सुनवाई के दौरान पीठ ने चुनाव आयोग को एक अहम निर्देश दिया जिसके तहत 27 सितंबर तक आयोग इस मामले में कोई निर्णय न ले ऐसे आदेश दिए है.ठाकरे गुट के द्वारा मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल द्वारा किये गए आक्रामक जिरह के बाद अदलता ने यह निर्देश दिए है.सिब्बल ने कहां कि शिवसेना में हुई फूट के बाद इस मामले में चुनाव आयोग का पक्ष सामने आना जरुरी है.इसलिए सिब्बल ने चुनाव चिन्ह को लेकर तत्काल कोई निर्णय न लिया जाये ऐसी विनंती की जिसे मानते हुए संवैधानिक पीठ ने 27 तारीख तक ऐसा कोई निर्णय न ले ऐसे निर्देश दिया।साथ ही कहां कि अगली सुनवाई में अदालत 10 मिनट दोनों पक्षों की दलीलों को सुनाने के बाद अपना फैसला सुनायेगी। पांच 

पांच जजों की संवैधानिक पीठ के समक्ष बुधवार को सुनवाई होने के ही साथ शिंदे गुट के वकील ने शिवसेना के चुनाव चिन्ह धनुषबाण को फ्रीज ( जमा ) करने की मांग की.रिफ्रेंस के तौर पर शिंदे गुट के वकील ने 1968 के क़ानून के अनुसार किसी पार्टी का चुनाव चिन्ह आयोग द्वारा फ्रिज कर लिए जाने की जानकारी अदालत के समक्ष रखी.आयोग की कार्यवाही को अदालत न रोके ऐसी दलील भी दी गई.साथ ही चिन्ह से पहले विधायकों के अपात्रता पर निर्णय लेने की गुजारिश की शिंदे गुट की ओर से मामले की पैरवी वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी कर रहे है,शिंदे गुट द्वारा रखी गई दलील पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि अब तक के आदेशों में चुनाव आयोग ने कार्यवाही के कोई आदेश दिए है क्या?इस पर सिंघवी ने कहां की ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है.शिंदे गुट की दलील के बाद ठाकरे गुट के वकील सिब्बल ने कहां की राज्य के सत्तासंघर्ष के इस मामले के सामने आने के बाद चुनाव आयोग के अधिकारों की स्पष्टता सामने आना जरुरी है.
संवैधानिक पीठ के समक्ष कई महत्वपूर्ण मुद्दे है.16 विधायकों की अपात्रता का निर्णय लंबित होने से पहले पार्टी के चुनाव चिन्ह का निर्णय नहीं लिया जा सकता ऐसी दलील सिब्बल ने दी.

संवैधानिक पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद चुनाव आयोग की चिन्ह के संबंध में 27 सितंबर तक कोई निर्णय नहीं लिए जाने का निर्देश दिया।