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स्टेरॉयड से पालतू कुत्ते हो रहे 'खतरनाक', सुंदर और सुडौल दिखाने के लिए प्रकृति से खिलवाड़


नागपुर: पिछले कुछ दिनों में देशभर के कई शहरों से पालतू कुत्तों द्वारा मालिक सहित अन्य लोगों और बच्चों पर हमला करने के कई मामले सामने आये हैं। जिसमें कई लोगों की मौत हुई है। पालतू कुत्तों के व्यवहार में आये इस बदलाव और उनके आक्रामक होने को लेकर उनके पालने पर कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं। कुत्तो के इस आक्रामक होने को लेकर पशु चिकित्स्कों ने बड़ा खुलासा किया है। जिसके तहत पालतू कुत्तो के आक्रामक होने के पीछे उनको दिए जाने वाला स्टेरॉयड है। 

सुडौल और सुन्दर दिखाने में हो रहा उपयोग 


एक समय पर प्रोटीन सप्लीमेंट का प्रयोग बॉडी बिल्डर करते हैं, लेकिन अब बड़े पैमाने पर इसका उपयोग कुत्तो को सुंदर और सुडौल दिखाने के लिए किया जा रहा है। स्टीरायड देकर पालतू कुत्तो की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए भी किया जा रहा है। कुत्तो के दिये जाने वाला प्रोटीन और स्टेरॉयड लगातार बढ़ता जा रहा है। दिए जारहे इस प्रोटीन के कारण कुत्ते की कैलोरी बर्न नहीं होती है तो उसके व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है। चिड़चिड़ा होने के साथ वह बेवजह भोंकने लगता है, हमला करता है। कई बार अपने मालिक को भी शिकार बना लेता है।

आसानी से मिल रहे प्रोटीन सप्लीमेंट


पेट्स मार्ट के संचालक बताते हैं कि कुत्तों के लिए बाजार में 1500 से 3000 रुपए तक के सप्लीमेंट उपलब्ध हैं। इसके पीछे मकसद यही होता है कि कुत्ते दिखने में ज्यादा खतरनाक दिखें। उनके जोड़ों में कोई दिक्कत न हो और साथ ही उनके बाल और त्वचा खूबसूरत बनी रहे। एक पशु चिकित्सक ने बताया कि कई सप्लीमेंट्स ऐसे होते हैं जिनमें स्टेरॉयड मिला होता है। इनके प्रयोग से डाबरमैन, जर्मन शेफर्ड, रॉटविलर, ग्रेट डेन, बॉक्सर, पिटबुल जैसी नस्लों के कुत्ते खूंखार नजर आते हैं। 

कैलोरी बर्न करना जरूरी


डाक्टरों के मुताबिक कुत्तों को जो खुराक या सप्लीमेंट दिए जाते हैं उससे उनके भीतर बहुत ऊर्जा इकट्ठा हो जाती है। घरों में पले कुत्तों की ऊर्जा खत्म करने या कैलोरी बर्न करने का इंतजाम नहीं होता है। ऐसे में उनके व्यवहार में परिवर्तन आता है। ऐसी स्थिति में कुत्ते किसी पर भी हमला कर सकते हैं। 

इतना व्यायाम कराएं कि जुबान लटकने लगे


कुत्तों के ट्रेनर के मुताबिक कुत्तों में ऊर्जा बहुत होती है। यदि इनको थकाया नहीं गया तो ये आक्रामक हो जाते हैं। कुत्तों को टहलाने के नाम पर सौ-दो सौ मीटर का चक्कर लगवाया जाता है। मगर इससे इनकी ऊर्जा खत्म नहीं होती। एक बड़े कुत्ते को कम से कम 10-12 किलोमीटर दौड़ाना जरूरी है। उससे इतना व्यायाम कराया जाए कि उसकी जुबान बाहर लटकने लगे। यदि इतना नहीं कर सकते तो कुत्तों को नहीं पालना चाहिए। 

कुत्तो की दिनचर्या से न करें छेड़छाड़ 


पशु चिकिस्तक ने बताया कि, कुत्तो के दिनचर्या के साथ कोई छेड़छाड़ न करें। उन्हें प्राकृतिक भोजन ही दें। प्रोटीन के लिए मांस और अंडा देना चाहिए। वहीं कैल्शियम के लिए केवल दूध देना चाहिए। उन्होंने  आगे कहा कि, दाल, चावल, रोटी भी पालतू कुत्तों को दे सकते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक कुत्तों का वैक्सीनेशन अति आवश्यक है। साथ ही उसकी नसबंदी भी करानी चाहिए।