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Nagpur

ग्रीन सिटी रही उपराजधनी होती जा रही ट्री फ्री सिटी, पेड़ गिरने की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता


नागपुर: शहर विकास में मजबूत हो रहा है लेकिन ज़मीन पर तन कर खड़े पेड़ कमजोर हो रहे है। बीते कुछ वर्षों में शहर की आबादी जिस तरह से बढ़ रही है और इंफ्रास्टक्चर विकसित हो रहा है। उसी तेजी से हरियाली ख़त्म हो रही है। हरियाली का ख़त्म होना बड़ी चिंता हो सकती है लेकिन उससे बड़ी चिंता है लगातार पेड़ों का गिर जाना।  हालत ऐसे हो चले है की ऐसे पेड़ जो जाने ही इसलिए जाते है की ज़मीन पर तन कर खड़े रखते है वो भी हल्की आंधी और बारिश में धराशाई हो रहे है।। जानकर ऐसी स्थिति के लिए ग्लोबल वार्मिंग के साथ विकास को जिम्मेदार मानते है।

पर्यावरण के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का मानना है की शहर को विकास की रफ़्तार में जिस तेजी से झोंका जा रहा है।। उस तेजी से पहले से मौजूद पेड़ों की चिंता नहीं की जा रही है।।ग्लोबल वार्मिंग समस्या है लेकिन पेड़ों के संरक्षण को लेकर जिस तरह से काम होना चाहिए वह नहीं हो रहा है।।  निशिकांत जाधव मध्य प्रदेश के चीफ फॉरेस्ट कंजरवेटर पद से रिटायर हुए है।। उनकी जिंदगी जंगलों में पेड़ों के साथ बीती है।।और इन दिनों में नागपुर में रहकर इकोलोजिस्ट के तौर पर काम कर रहे है।। उनके मुताबिक शहर में जलस्तर का कम होना और पेड़ों की जड़ों को पर्याप्त मात्रा में पानी न मिल पाना पेड़ों के गिरने की मुख्य वजह है।।

सीमेंट का इस्तेमाल पहले घर और इमारत निर्माण में इस्तेमाल होता था लेकिन अब इससे सड़के बन रही है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं के मुताबिक जिस तरह से शहरों में सड़के और फुटपाथ का निर्माण हो रहा है वह बरसाती पानी को ज़मीन में रिसने देने में बड़ी बढ़ा है। सड़को के निर्माण के दौरान पेड़ों के आस पास मिट्टी के क्षेत्र को ख़त्म कर दिया जा रहा है जिस वजह से पेड़ो को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है जिस वजह से उनकी आयु कम हो रही है और वो कमजोर हो रहे है।

इस समस्या से इतर निशिकांत जाधव दूसरी तरह की समस्या पर ध्यान आकर्षित कर रहे है। उनके मुताबिक शहर शहर का अलग मिज़ाज होता है और आबोहवा होती है इसलिए जरुरी है की शहर के इकोसिस्टम को ध्यान में रखकर पेड़ लगाए जाये।  नागपुर में ऐसा नहीं हो रहा है और जो पेड़ गिर रहे है उनमे अधिकतर शहर के वातावरण के अनुकूल नहीं है।

कारणों का पता लगाने ले रहे विशेषज्ञों की मदत

शासन-प्रशासन द्वारा वृक्षारोपण की मुहिम चलाकर पेड़ों को लगाया जा रहा है।। लेकिन लगाए गए पेड़ो को जिन्दा रखना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे पेड़ जो वर्षो से तन कर खड़े है हवा के झोंखे से गिर जा रहे है। बीते दिनों एक ऐसी ही घटना मनपा मुख्यालय में घटी थी।गनीमत नहीं की इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। नागपुर महानगर पालिका के मुताबिक वह पेड़ों के बड़े पैमाने पर गिरने की घटना को गंभीरता से ले रहा है और  कारणों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की मदत के रहा है।

साल दरसअल बढ़ रही पेड़ गिरने की घटना 

बीते पांच वर्षो में आंकड़ों पर नजर डालें तो पेड़ और पेड़ों की टहनियाँ गिरने की घटनायें लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2019-20 पेड़ या टहनियाँ गिरने की 60 घटनायें हुई। 20-21 में 66, 21-22 में 112, 2022-23 में 170 जबकि शुरू 2023-24 में अब तक 104 घटनाएं पेड़ गिरने या टहनियाँ गिरने हो चुकी है। यह आँकड़े सिर्फ महानगर पालिका के है। आंकड़े बता रहे है की शहर के पेड़ किस स्थिति में है इसलिए उन्हें बचाना कितना जरुरी।