मेलघाट में हाहाकार: भीषण जलसंकट के बीच टैंकर और बोरवेल के भरोसे हजारों जिंदगियां, पानी के लिए मीलों पैदल चलने को मजबूर आदिवासी
अमरावती: अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में इस साल भीषण जलसंकट खड़ा हो गया है। बढ़ती गर्मी और सूखते जलस्रोतों ने आदिवासी बस्तियों में त्राहि-त्राहि मचा दी है। स्थिति इतनी गंभीर है कि प्रशासन को दर्जनों गांवों में टैंकरों और निजी कुओं के सहारे पानी पहुंचाना पड़ रहा है।
चिखलदरा: 9 गांवों में 20 टैंकरों से सप्लाई
मेळघाट के चिखलदरा तालुका में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहाँ के 17 गांवों में पानी की भारी किल्लत है, जहाँ फिलहाल बोरवेल और निजी कुओं के जरिए जलापूर्ति की जा रही है। वहीं, 9 गांवों की प्यास बुझाने के लिए प्रशासन को 20 टैंकर लगाने पड़े हैं। जलस्रोत पूरी तरह सूख जाने के कारण आदिवासी महिलाओं को तपती धूप में सिर पर बर्तन रखकर पानी के लिए मीलों लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।
पूरे जिले का हाल: 60 गांवों के लिए 67 जलस्रोत
सिर्फ चिखलदरा ही नहीं, बल्कि जिले के 14 तालुकों के 60 गांवों में पानी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। जिला प्रशासन ने इन गांवों के लिए,
- 26 बोरवेल का अधिग्रहण किया है।
- 41 निजी कुओं के माध्यम से पानी की व्यवस्था की है।
- कुल मिलाकर 67 अलग-अलग जलस्रोतों के जरिए प्रभावित इलाकों में किसी तरह पानी पहुंचाया जा रहा है।
धारणी में राहत की उम्मीद: पाइपलाइन का काम शुरू
एक ओर जहाँ किल्लत बढ़ रही है, वहीं धारणी तालुका से राहत की खबर भी है। यहाँ के 5 गांवों में स्थायी समाधान के लिए नई पाइपलाइन बिछाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। प्रशासन को उम्मीद है कि पाइपलाइन का काम पूरा होते ही इन गांवों के नागरिकों को पानी की समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।
आदिवासियों का संघर्ष
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल गर्मी में मेळघाट को इसी तरह के संकट से गुजरना पड़ता है। ऊंचे पहाड़ी इलाकों में स्थित गांवों तक टैंकर पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती होती है। फिलहाल, आदिवासी परिवार अपनी बुनियादी जरूरत के लिए पूरी तरह सरकारी टैंकरों और अस्थायी बोरवेल पर निर्भर हैं।
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