युद्ध की मार से पूर्व विदर्भ का राइस मिल उद्योग संकट में, चावल निर्यात ठप; हजारों परिवारों के सामने रोज़गार का संकट
गोंदिया: खाड़ी देशों में जारी युद्ध का असर अब भारत के उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। इसका सीधा प्रभाव पूर्व विदर्भ के राइस मिल उद्योग पर पड़ा है। खासकर Gondia जिले को “राइस सिटी” के नाम से जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में राइस मिल संचालित होती हैं। लेकिन युद्ध के चलते आखाती देशों को होने वाली चावल की निर्यात पिछले करीब 15 दिनों से पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे राइस मिल उद्योग गहरे संकट में आ गया है।
जानकारी के अनुसार पूर्व विदर्भ के Gondia, Bhandara, Gadchiroli, Chandrapur और Nagpur जिलों में कुल 1110 राइस मिल संचालित हैं। इनमें गोंदिया और भंडारा जिलों में राइस मिलों की संख्या सबसे अधिक है। यहां तैयार होने वाला उष्णा चावल बड़ी मात्रा में आखाती देशों को निर्यात किया जाता है।
हालांकि युद्ध की स्थिति के कारण चावल का निर्यात पूरी तरह रुक गया है। इसके चलते सैकड़ों कंटेनर Jawaharlal Nehru Port (JNPT), Mumbai पर अटके हुए हैं, जिससे व्यापारियों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बाजार में चावल के दाम भी गिर गए हैं और खरीदार नहीं मिलने से कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
विदर्भ के इस चावल की सबसे अधिक मांग South Africa, Iran, Israel, Qatar और Saudi Arabia जैसे देशों में रहती है। लेकिन पिछले करीब 16 दिनों से युद्ध जारी रहने के कारण निर्यात बंद हो गया है।
इसका सबसे ज्यादा असर राइस मिल उद्योग से जुड़े मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही निर्यात शुरू नहीं हुआ तो हजारों कामगारों और उनके परिवारों के सामने रोज़गार और आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
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