ओला-उबर और रैपिडो के लिए नई नीति लाने की तैयारी, नितिन गडकरी बोले- 12 करोड़ लोगों को मिल सकता है रोजगार
नागपुर: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप आधारित परिवहन सेवाओं को लेकर नई नीति लाने की घोषणा की है। नागपुर में आयोजित ‘मंथन’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि निजी वाहनों को टैक्सी सेवा से जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। गडकरी के मुताबिक, इस तरह की व्यवस्था के विस्तार से देश में करीब 12 करोड़ लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावना है।
निजी वाहनों से रोजगार बढ़ाने की योजना
गडकरी ने बताया कि विदेश यात्रा के दौरान उन्होंने देखा था कि कनाडा में कुछ सेवानिवृत्त शोधकर्ता अपने निजी वाहनों का इस्तेमाल टैक्सी के रूप में करके अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे थे। इसी अनुभव से उन्हें भारत में भी निजी वाहनों को टैक्सी सेवा से जोड़ने का विचार आया।
उन्होंने कहा कि ओला, उबर और रैपिडो जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निजी वाहन मालिकों को यात्रियों तक पहुंचने और कमाई का अवसर मिल सकता है। इस मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू करने से रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।
गडकरी ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2018 में परिवहन मंत्री रहते हुए उन्होंने इस दिशा में निर्णय लिया था। अब इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने और अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए नई नीति की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
क्या होगा नई नीति का उद्देश्य?
नई नीति के पीछे प्रमुख विचार निजी वाहनों की उपलब्धता का इस्तेमाल करते हुए परिवहन सेवाओं का विस्तार करना और लोगों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना है। ऐप आधारित सेवाओं के माध्यम से वाहन मालिक यात्रियों को परिवहन सुविधा दे सकेंगे, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
हालांकि, प्रस्तावित नीति के विस्तृत प्रावधान, इसके लागू होने की समयसीमा और वाहन मालिकों के लिए पात्रता की शर्तों का पूरा विवरण अभी इस घोषणा में सामने नहीं आया है। इसलिए इसे घोषित दिशा और प्रस्तावित पहल के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि लागू हो चुकी नई व्यवस्था के रूप में।
नागपुर में ‘मंथन’ कार्यक्रम के दौरान की घोषणा
नितिन गडकरी नागपुर में ‘मंथन’ की ओर से आयोजित शिक्षक, प्राध्यापक और स्नातक मतदाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के संदर्भ में किया गया था।
इस दौरान उन्होंने रोजगार के अवसरों के अलावा शिक्षा की गुणवत्ता, शोध और विकास पर भी विचार रखे। गडकरी ने कहा कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को समाज की जरूरतों के अनुरूप शोध को बढ़ावा देना चाहिए। उनके अनुसार, ज्ञान और तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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