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Chandrapur

99.95% अंक लाने के बाद भी क्यों टूटा अनुराग? नीट में टॉप करने वाला 19 वर्षीय छात्र ने कॉलेज में दाखिले के दिन कर ली आत्महत्या


चंद्रपुर: देशभर में मेडिकल की सबसे कठिन परीक्षा NEET-UG 2025 में 99.99 प्रतिशत अंक हासिल करने वाला 19 वर्षीय अनुराग अनिल बोरकर अब इस दुनिया में नहीं है। मंगलवार की सुबह, जब परिवार वालों ने उसे जगाने की कोशिश की, तो वह अपने कमरे में मृत पाया गया।

अनुराग ने नीट में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए ओबीसी वर्ग में 1475वीं रैंक हासिल की थी। उसे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलना तय था। लेकिन उसी सपनों के दिन, यानी प्रवेश की तारीख पर उसने अपनी जान दे दी।

सिंदेवही पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से अनुराग का सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें उसने लिखा था, "मैं डॉक्टर नहीं बनना चाहता।" प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि इतनी बड़ी सफलता के बावजूद अनुराग का मन इस करियर में नहीं था। पुलिस का अनुमान है कि परिवार और समाज की अपेक्षाओं का भारी दबाव उसे यह कदम उठाने पर मजबूर कर गया।

शानदार सफलता, फिर भी अधूरा सपना

अनुराग की मौत यह दिखाती है कि लाखों छात्रों का सपना बनने वाली सफलता भी हर किसी को मानसिक संतोष नहीं दे सकती। सवाल गंभीर है – अगर सफलता के शिखर पर खड़ा छात्र भी खुश नहीं है, तो हमारी शिक्षा और करियर की व्यवस्था बच्चों को कहाँ ले जा रही है?

विशेषज्ञों की चेतावनी

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह घटना स्पष्ट संकेत देती है कि केवल अकादमिक अंक और सीट हासिल करना जीवन का मकसद नहीं हो सकता। जब बच्चों की इच्छाओं से अलग करियर उन पर थोपा जाता है, तो वे मानसिक दबाव में टूट सकते हैं। एक विशेषज्ञ ने कहा, "अनुराग का मामला समाज के लिए चेतावनी है, हमें बच्चों की सुनने और समझने की जरूरत है, वरना यह सिलसिला खत्म नहीं होगा,"।

गाँव में शोक, समाज के लिए सबक
अनुराग की मौत ने नवरगांव में गहरा शोक फैला दिया। यह परिवार, दोस्तों और पूरे समाज के लिए झकझोरने वाला संदेश है। 19 साल का यह सवाल अब अधूरा है, एक बेटा जिसने देश की सबसे कठिन परीक्षा में 99.95 प्रतिशत अंक हासिल किए, आखिर क्यों जीवन की जंग हार गया?