logo_banner
Breaking
  • ⁕ जिन पुरुषों ने लाड़ली बहना का पैसा लिया, उससे होगी वसूली; मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा ऐलान; किसान कर्ज माफ़ी का भी लिया निर्णय ⁕
  • ⁕ नागपुर में एफडीए की बड़ी कार्रवाई, 419 किलो प्रतिबंधित सुगंधित तंबाकू जब्त ⁕
  • ⁕ Gadchiroli: माओवादियों का हथियार निर्माण ठिकाना ध्वस्त, जंगल में दबा विस्फोटक सामग्री पुलिस ने की नष्ट ⁕
  • ⁕ Buldhana: डीज़ल संकट से भड़के किसान, नागपुर–पुणे–मुंबई हाईवे किया जाम; सड़क पर लगा वाहनों की कतारें ⁕
  • ⁕ बढ़ती तपिश से लोग बेहाल, लेकिन कूलर बाजार में बंपर उछाल; पिछले साल से तीन गुना ज्यादा बिक्री ⁕
  • ⁕ प्रफुल्ल गुडधे बने नागपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष, जिम्मेदारी के लिए पार्टी को दिया धन्यवाद; कहा- सभी को साथ लेकर करूँगा काम ⁕
  • ⁕ Amravati: भीषण गर्मी के बीच शिवटेकड़ी जॉगिंग ट्रैक पर लगाए गए वाटर फॉगर्स, नागरिकों को मिली राहत ⁕
  • ⁕ विदर्भ सहित राज्य के 247 नगर परिषदों और 147 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित, देखें किस सीट पर किस वर्ग का होगा अध्यक्ष ⁕
  • ⁕ अमरावती में युवा कांग्रेस का ‘आई लव आंबेडकर’ अभियान, भूषण गवई पर हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ⁕
  • ⁕ Gondia: कुंभारटोली निवासियों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नगर परिषद पर बोला हमला, ‘एक नारी सबसे भारी’ के नारों से गूंज उठा आमगांव शहर ⁕
Maharashtra

धूमालवाड़ी गांव ने प्राप्त किया राज्य के पहले ‘फ्रूट विलेज’ होने का गौरव


सतारा: सतारा जिले के फलटन तहसील के धूमलवाड़ी गांव ने राज्य का पहला फल गांव होने का सम्मान अर्जित किया है। इस गांव के किसान 1980 से ही बाग लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान में यहां ढाई सौ हेक्टेयर से अधिक बाग-बगीचे हैं। इस गाँव का आधुनिक और टिकाऊ कृषि का यह प्रयोग न केवल राज्य बल्कि देश के किसानों के लिए एक आदर्श विकल्प बन गया है।

दो सौ घरों वाले धूमलवाड़ी गांव की आबादी करीब 1300 है। गाँव में 1716 हेक्टेयर भूमि है और इसमें से अधिकांश भूमि पहाड़ी है। उपजाऊ भूमि, बगीचों के लिए अनुकूल प्राकृतिक और भौगोलिक वातावरण के कारण 1980 में पहली बार यहां अनार की खेती शुरू हुई। इसकी सफलता के बाद अनार की खेती के क्षेत्र में भारी वृद्धि हुई। इस दौरान अनार पर तेला और झुलसा रोग लगने के कारण किसानों ने अन्य विकल्पों का परीक्षण शुरू कर दिया।

अब 275 हेक्टेयर क्षेत्र में अंगूर, अनार, अमरूद, सीताफल, आंवला, इमली, अंजीर, केला, बैंगनी, ड्रैगन फ्रूट, नींबू, संतरा, नारियल, आम, पपीता, लीची, सेब, एप्पल बोर, खजूर, ब्लैकबेरी, शहतूत की खेती की जाती है। साथ ही फणस, करवंद, स्टार फ्रूट, वॉटर एप्पल समेत 20 प्रकार के फलों के पेड़ों की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है।

छोटी जोत वाले किसान तटबंधों पर फलों के पेड़ लगा रहे हैं। बगीचों में ड्रिप सिंचाई का उपयोग किया जा रहा है और अधिकांश किसान जैविक तरीके से खेती कर रहे हैं।

गुणवत्ता, स्वाद और गुणवत्ता के कारण यहां के फलों की बाजार में काफी मांग है। उत्पादित फल सीधे बांध पर ही बेचे जाते हैं और किसानों को हर साल लगभग 25 करोड़ की आय हो रही है।

बाग-बगीचों के इस सफल प्रयोग से गांव के 70 प्रतिशत युवाओं को गांव में ही रोजगार मिल गया है। अब गांव की ये युवा पीढ़ी फल प्रसंस्करण उद्योग खड़ा करने के लिए आगे आ रही है।