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किसी भी हालत में सड़क दुर्घटना में मृत्यु दर करें कम, सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जस्टिस सप्रे ने दिया आदेश


नागपुर: कोरोना जैसी महामारी में जितनी मौतें नहीं हुई है, उससे ज्यादा मौत सड़कों पर हो रही है। दुनिया में जितने भी विकसित देश हैं उन सबसे ज्यादा मौतें भारत में हुई हैं। इसलिए सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने की मानसिकता बनाएं। किसी भी परिस्थिति में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को कम करें। सोमवार को सड़क दुर्घटनाओं पर सर्वोच्च न्यायालय की सुरक्षा समिति की आयोजित बैठक में सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अभय सप्रे ने यह आदेश दिया। 

इस बैठक में परिवहन आयुक्त विवेक भीमनवार, कलेक्टर डॉ. विपिन इटंकर, संयुक्त पुलिस आयुक्त अश्वती दोरजे, जिला पुलिस अधीक्षक विशाल आनंद, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी रवींद्र भुयार, स्वास्थ्य सेवा के संयुक्त निदेशक डॉ. पूजा सिंह, परिवहन उपायुक्त चेतना तिड़के आदि सहित सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत गैर सरकारी संगठन जन अवच विशेष आमंत्रित लोगों में शामिल थे।

शहर में गई 399 की जान

न्यायमूर्ति सप्रे ने इस बैठक के दौरान इन सभी संगठनों की राय जानी। नागपुर जिले में बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और वर्ष 2022 में अक्टूबर माह तक सड़क दुर्घटनाओं में 399 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि यह संख्या लगातार बढ़ रही है और जिले में दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या को कम करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मौतें तीन कारणों से होती हैं हेलमेट का प्रयोग नहीं करना, सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं करना, अनियंत्रित गति से वाहन चलाना।

स्कूल स्तर पर दें बच्चों को सड़क सुरक्षा का प्रशिक्षण

प्राथमिक स्तर पर बच्चों को सड़क सुरक्षा का प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत बताते हुए उन्होंने स्कूल स्तर पर इस संबंध में विशेष गतिविधियों को लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को कार्यालय के सभी कर्मचारियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को बिना हेलमेट के कार्यालय नहीं ले जाना चाहिए। हेलमेट जैसी चीजों को भूल जाना, सीट बेल्ट नहीं लगाना मौत को घसीटने जैसा है।बीपी, शुगर का मरीज अपनी गोलियां कभी नहीं भूलता। क्योंकि स्वास्थ्य एक खेल है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि कार लेने के बाद हेलमेट का इस्तेमाल नहीं करना, सीट बेल्ट नहीं लगाना मतलब मौत है। 

समाज की मानसिकता बदलना जरूरी

बैठक में जस्टिस स्प्रे ने कहा कि इस संबंध में समाज की मानसिकता को बदलने की जरूरत है। उन्होंने विदेशों में भारत की तुलना में अधिक गतिशील यातायात है। लेकिन दुर्घटना के बाद मौत की दर कम है। जापान जैसे उन्नत देशों में 400,000 दुर्घटनाओं में 4000 लोग मारे जाते हैं। भारत में 400,000 दुर्घटनाओं के बाद 100,000 लोग मारे जाते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण सुरक्षा मानकों का उपयोग न करना और सुरक्षा नियमों का पालन न करना है और इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है। 

महाराष्ट्र राज्य में दूसरे नंबर पर

भारत में दुर्घटनावश होने वाली मौतों में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है।कोरोना महामारी के दौरान जितने नागरिक महामारी के कारण नहीं मर रहे हैं, उतने नागरिक सड़कों पर मर रहे हैं और इसे नियंत्रण में लाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगली समीक्षा में जिले में दुर्घटना संभावित स्थानों और दुर्घटना में होने वाली मौतों की दर को कम किया जाना चाहिए।