AIIMS नागपुर में रिक्त पदों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, नियुक्य किया अदालत मित्र; दो हफ्तों में सुधारात्मक सुझावों की सूची देने का दिया निर्देश
नागपुर: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान- नागपुर (All India Institute Of Medical Sciences Nagpur) में स्टाफिंग संकट को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ (Bombay HighCourt Nagpur Bench) ने सख्त रुख अपनाया है। 373 स्वीकृत पदों में से 137 पद खाली होने पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। अदालत ने रिक्त पदों को लेकर सुधारात्मक सुझावों को लेकर अदालत मित्र को नियुक्त किया। इसी के साथ अदालत ने दो हफ्तों के अंदर अपनी रिपोर्ट अदालत को देने के निर्देश भी दिए।
एम्स नागपुर में फैकल्टी और अन्य महत्वपूर्ण पदों की कमी को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। 373 स्वीकृत पदों में से 137 पद खाली होने की जानकारी सामने आने पर अदालत ने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया और मामले की सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि एम्स में लगातार नई सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। हर वर्ष नए विभाग शुरू हो रहे हैं और बेड की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। इसी के अनुरूप स्टाफिंग पैटर्न में बदलाव किया जा रहा है, ताकि आवश्यकतानुसार डॉक्टरों और कर्मचारियों की नियुक्ति की जा सके। हालांकि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन कई बार योग्य और आवश्यक मानकों पर खरे उतरने वाले उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हो पाते, जिससे नियुक्तियों में देरी होती है।
न्यायमूर्ति अनिल किल्लोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि लंबे समय तक पद खाली रहने से संस्थान की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता जुगलकिशोर गिल्डा को अदालत मित्र नियुक्त कर दो सप्ताह के भीतर सुधारात्मक सुझावों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद केंद्र सरकार को उन सुझावों पर अपना जवाब दाखिल करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि जो सुझाव व्यवहारिक होंगे, उनके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक होने पर न्यायालय उचित आदेश पारित करेगा।
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