विश्वविद्यालय में प्र-कुलपति पद पर घमासान, मैदान में 29 प्रोफेसर, आचार संहिता हटते ही प्र-कुलपति नियुक्ति के संकेत
नागपुर: नागपुर विश्वविद्यालय में नई कुलपति की नियुक्ति के बाद अब प्रशासन के सामने अगली बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। प्र-कुलपति पद के लिए दावेदारों की लंबी कतार लग चुकी है, जिससे चयन प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आचार संहिता और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यह फैसला विश्वविद्यालय के भविष्य की दिशा तय करेगा।
राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में नई कुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर के कार्यभार संभालते ही प्र-कुलपति पद को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस महत्वपूर्ण पद के लिए करीब 29 वरिष्ठ प्रोफेसरों ने आवेदन किया है, जिससे चयन प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण बन गई है।
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में दावेदार होने के कारण प्रशासन के सामने संतुलन साधने की स्थिति है। प्र-कुलपति पद न केवल अकादमिक बल्कि प्रशासनिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में किसी एक नाम पर सहमति बनाना आसान नहीं है। इस बीच, आचार संहिता लागू होने के चलते फिलहाल प्र-कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगी हुई है। कुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर ने स्पष्ट किया है कि आचार संहिता हटने और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही प्र-कुलपति की नियुक्ति की जाएगी।
गौरतलब है कि लंबे समय तक विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति की अनुपस्थिति के कारण कई पद प्रभार के भरोसे चल रहे थे। अब नई कुलपति की नियुक्ति के बाद विश्वविद्यालय को नियमित प्र-कुलपति और अधिकारियों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में लिया जाने वाला यह फैसला नागपुर विश्वविद्यालय की प्रशासनिक स्थिरता और शैक्षणिक दिशा को मजबूती देगा।
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