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Nagpur

विश्वविद्यालय की बड़ी लापरवाही, आधे घंटे की देरी से पहुंचा बीए मास कम्युनिकेशन के छठे सेमेस्टर का पेपर; छात्रों में रोष


नागपुर: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की बड़ी लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। यूनिवर्सिटी के परीक्षा विभाग के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण बीए इन मास कम्युनिकेशन के छठवें सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। परीक्षा केंद्र पर तय समय तक न तो अटेंडेंस शीट पहुंची और न ही प्रश्नपत्र, जिसके चलते निर्धारित समय पर परीक्षा शुरू ही नहीं हो सकी। विश्वविद्यालय की इस लापरवाही से छात्रों में आक्रोश दिखाई दिया। 

राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की लापरवाही एक बार फिर छात्रों पर भारी पड़ती नजर आई। एक ओर विश्वविद्यालय समय पर परीक्षाएं आयोजित कराने में नाकाम साबित हो रहा है, तो दूसरी ओर चल रही परीक्षाओं में भी गंभीर अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं। बुधवार को शहर के आंबेडकर महाविद्यालय में ऐसा ही मामला देखने को मिला, जहां बीए इन मास कम्युनिकेशन छठवें सेमेस्टर के छात्रों को परीक्षा शुरू होने के बाद भी लंबे समय तक प्रश्नपत्र का इंतजार करना पड़ा।

दरअसल, 20 मई को बीए इन मास कम्युनिकेशन अंतिम सेमेस्टर का “फोटो एंड ट्रैवल जर्नलिज्म” विषय का पेपर आयोजित किया गया था। विश्वविद्यालय द्वारा तय समय के अनुसार परीक्षा दोपहर 2:30 बजे शुरू होनी थी। सभी छात्र-छात्राएं समय से परीक्षा केंद्र पहुंच गए थे और परीक्षा शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी न तो छात्रों को परीक्षा कक्ष में बैठाया गया और न ही प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया।

जब छात्रों ने देरी का कारण पूछा तो पता चला कि परीक्षा केंद्र पर अब तक प्रश्नपत्र और अटेंडेंस शीट ही नहीं पहुंची है। यह सुनते ही छात्रों में नाराजगी फैल गई।विश्वविद्यालय प्रशासन की इस गंभीर लापरवाही से छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कई छात्र-छात्राओं ने इसे उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।

आधे घंटे बाद पहुंचे प्रश्नपत्र 

करीब आधे घंटे के इंतजार के बाद प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र पहुंचा, जिसके बाद छात्रों को परीक्षा कक्ष में बैठाकर परीक्षा शुरू कराई गई। हालांकि, इस पूरी घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलगुरु लगातार परीक्षा व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर सामने आ रही ऐसी लापरवाहियां उन दावों की हकीकत उजागर कर रही हैं।