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Nagpur

ताडोबा की 'झीनत' बनी चार शावकों की मां, ओडिशा में सफल रही अंतरराज्यीय बाघ पुनर्वास योजना


नागपुर: महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से ओडिशा के सिमिलीपाल जंगल में भेजी गई बाघिन 'झीनत' ने चार शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही दो राज्यों के वन विभागों द्वारा चलाई गई अंतरराज्यीय बाघ पुनर्वास और संरक्षण योजना को बड़ी सफलता मिली है। इस उपलब्धि को भारतीय वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने और आनुवंशिक विविधता बनाए रखने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार ने ताडोबा से बाघों को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अक्टूबर-नवंबर 2024 में ताडोबा से 'जमुना' और 'झीनत' नामक दो बाघिनों को सिमिलीपाल भेजा गया था।

हालांकि, दिसंबर 2024 में 'झीनत' सिमिलीपाल की सीमा पार कर झारखंड और पश्चिम बंगाल में करीब 250 किलोमीटर तक भटक गई थी। इसके बाद ओडिशा और पश्चिम बंगाल के वन विभागों ने संयुक्त अभियान चलाकर उसे सुरक्षित पकड़ा। कई महीनों तक निगरानी में रखने के बाद अप्रैल 2025 में उसे फिर से सिमिलीपाल के मुख्य जंगल में छोड़ा गया।

वहीं, स्थानीय नर बाघ के साथ मिलन के बाद अब 'झीनत' ने चार शावकों को जन्म दिया है। वन विभाग सैटेलाइट कॉलर की मदद से बाघिन और उसके शावकों की लगातार निगरानी कर रहा है।

ताडोबा में बढ़ती बाघ संख्या के चलते यहां के बाघ अन्य अभयारण्यों में बाघों की आबादी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले भी ताडोबा से सह्याद्री टाइगर रिजर्व और नवेगांव-नागझिरा अभयारण्य में बाघिनों का सफल पुनर्वास किया जा चुका है।