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Nagpur

7/12 पर तलाठी के साइन–स्टांप की ज़रूरत खत्म! राजस्व विभाग ने डिजिटल सातबारा को दी कानूनी मान्यता


नागपुर: राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए डिजिटल सातबारा (Digital 7/12) को पूरी कानूनी मान्यता दे दी है। अब आम नागरिकों को सातबारा के लिए न तो पटवारी ऑफिस के चक्कर लगाने होंगे और न ही साइन–स्टाम्प की जरूरत पड़ेगी। यह फैसला ग्रामीण व्यवस्था में वर्षों से चली आ रही मनमानी, देरी और भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

महाराष्ट्र सरकार ने रेवेन्यू विभाग में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रशासनिक सुधार करते हुए डिजिटल सातबारा (Digital 7/12) को पूरी कानूनी मान्यता प्रदान कर दी है। इस निर्णय के बाद अब सातबारा के लिए पटवारी के सिग्नेचर या स्टांप की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त हो गई है। 

राज्य सरकार द्वारा जारी यह आदेश महाराष्ट्र लैंड रेवेन्यू कोड 1966 और महाराष्ट्र लैंड रेवेन्यू राइट्स रिकॉर्ड्स एंड रजिस्ट्रेशन रूल्स 1971 के तहत लागू किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार, डिजिटल सिग्नेचर, QR कोड और 16 अंकों का वेरिफिकेशन नंबर युक्त सातबारा ही आधिकारिक और मान्य दस्तावेज़ माना जाएगा। इस डिजिटल सातबारा के साथ-साथ 8-A और बदलाव एक्सट्रैक्ट भी अब सभी सरकारी दफ्तरों, बैंकों, सेमी-गवर्नमेंट संस्थाओं और कोर्ट में कानूनी सबूत के रूप में स्वीकार किए जाएंगे।

नागरिक अब महाभूमि पोर्टल पर ऑनलाइन पेमेंट कर सिर्फ 15 रुपये की फीस में यह आधिकारिक सातबारा घर बैठे डाउनलोड कर सकेंगे। इसके अलावा, सेतु केंद्रों से भी लोग कम समय में यह दस्तावेज़ प्राप्त कर पाएंगे। यह फैसला ग्रामीण व्यवस्था में वर्षों से चली आ रही जटिल प्रक्रियाओं, देरी और अनावश्यक निर्भरता को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राजस्व विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया यह निर्णय भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में भी प्रभावी साबित होगा।

मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यह बदलाव किसानों, भूमि धारकों और आम नागरिकों के लिए तेज़, सरल और पारदर्शी सेवा सुनिश्चित करने वाला है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य की जनता इस सुविधा का स्वागत करेगी और इससे रेवेन्यू विभाग के कामकाज में नई गति आएगी।