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Corona Virus: दुनियाभर में बढ़ते कोविड मामलों के बीच, मध्य प्रदेश के स्कूलों ने बढ़ाई सतर्कता


भोपाल: चीन, अमेरिका, जापान समेत दुनियाभर में कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमीक्रॉन BF.7 ने एक बार फिर तबाही मचाना शुरू कर दिया है। इसे देखते हुए भारत का सरकारी तंत्र भी सक्रीय हो गया है और उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली जैसे सघन राज्यों में अफसरों को सार्वजानिक स्थलों पर कोविड प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। जानलेवा वायरस के इस नए वेरिएंट को लेकर WHO के अधिकारियों का मानना है कि ये अब तक के सभी वेरिएंट में सबसे अधिक खतरनाक है, जिसका बच्चों पर भी गहरा असर देखने को मिलेगा। 

चीन जापान जैसे देशों में ओमीक्रॉन BF.7, बच्चों पर हावी भी होने लगा है। इन स्थितिओं को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश के स्कूलों ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। सरदाना इंटरनेशनल स्कूल जैसे अन्य स्कूल जहां, देश के विभिन्न कोनों के साथ-साथ विदेशी छात्र-छात्राएं भी स्कूली शिक्षा व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने पहुंचते हैं, वहां स्कूल प्रशासन की तरफ से कोविड प्रोटोकॉल्स के तहत मास्क को अनिवार्य कर दिया गया है।

बढ़ेगी अभिभावक, टीचर्स दोनों की जिम्मेदारी

दो साल के लंबे अंतराल के बाद स्कूल पहुंचे बच्चों ने संक्रमण के भय से बाहर आकर, रेगुलर क्लासेज़ लेना शुरू की थीं, जबकि इस दौरान टीचर्स के साथ स्कूलों ने ऑनलाइन उपस्थिति पर काफी जोर दिया था। लेकिन जाहिर तौर पर फिजिकल क्लासेज का प्रभाव, वर्चुअल क्लासेज की तुलना में अधिक होता है। इसलिए स्कूलों को बंद रखना या कम उपस्थिति के साथ चालू रखने से बेहतर है हम शुरुआत से ही सावधानी बरतें। इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में पोषण से भरपूर खाना, रोज़ाना एक्सरसाइज़ और स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है। 

बच्चों में अच्छे पोषण का ध्यान न सिर्फ माता-पिता बल्कि टीचर्स को भी रखना चाहिए। जिससे वह न सिर्फ कोविड, बल्कि अन्य दूसरे जो बच्चे घर से बाहर हॉस्टल आदि में रहकर पढाई कर रहे हैं, उनके प्रति जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। डॉक्टर्स की सलाह को ध्यान में रखें और अगर आपका बच्चा 12 साल की उम्र से बड़ा है, तो उसे हर साल फ्लू वैक्सीन ज़रूर लगवाएं। साथ ही कोविड वैक्सीन के लिए योग्य है, तो वह भी लगवाएं।

संक्रमण के बारे में रखें पूरी जानकारी

अभी तक रिपोर्ट्स के अनुसार, कोरोना वायरस का नया वेरिएंट भारत में अभी सिमित स्तर पर है। हालांकि, सभी को यह जानकारी रहनी चाहिए कि दुनिया भर में क्या हो रहा है और बच्चों को इससे कैसे बचाया जा सकता है। BF.7 की R0 वैल्यू 10 से 18.6 है। यानी इस वेरिएंट से संक्रमित एक व्यक्ति, औसतन 10 से 18 लोगों को संक्रमित कर सकता है। WHO के अधिकारियों का मानना है कि ये अब तक के सभी वेरिएंट में सबसे ज्यादा है। 

इससे पहले डेल्टा की R0 वैल्यू 6-7 और अल्फा की R0 वैल्यू 4-5 थी। BF.7 वेरिएंट का पहला केस चीन के इनर मंगोलिया प्रांत में मिला था। अब तक ये वायरस भारत, अमेरिका, यूके, बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क समेत कई यूरोपीय देशों में फैल चुका है। कोरोना का बढ़ता कहर, भारत और खासकर भारतीय स्कूलों पर अपना बुरा प्रभाव न छोड़ पाए, इसके लिए माता-पिता, टीचर्स और समाज सभी को ईमानदारी से एक होकर लड़ना होगा।