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आखिर कैसे चुने जातें हैं पोप, कौन-कौन होता है शामिल? जाने चयन की पूरी प्रक्रिया


कैथोलिक क्रिश्चियन धर्म के सबसे बड़े धर्म गुरु पॉप फ्रांसिस का निधन हो गया है। उन्होंने वेटिकन सिटी में 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। पोप पिछले कई महीने से स्वस्थ्य संबंधी समस्यों से जूझ रहे थे, इस कारण उनका इलाज अस्पताल में किया जा रहा था। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से वह वेटिकन सिटी में ही उनका इलाज किया जा रहा था। पोप फ्रांसिस के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी की चर्चा शुरू हो गई। वहीं उससे भी ज्यादा ये की आखिर नया पोप चुना कैसे जाएगा। 

नए पोप चुनने के लिए एक प्रक्रिया का पालन करता है। इस प्रक्रिया में दुनिया भर में वरिष्ठ क्रिश्चन धर्म को मानने वाले धर्म गुरु शामिल होते हैं। नए पोप का चयन एक गुप्त और पारंपरिक प्रक्रिया है, जिसे 'कॉनक्लेव' कहा जाता है। यह प्रक्रिया कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धार्मिक नेता, पोप, के निधन या इस्तीफे के बाद शुरू होती है। आइयें जानतें हैं आखिरी कैसी होता है पोप का चयन

पोप का चयन कैसे होता है?

  • कॉनक्लेव की शुरुआत: जब पोप का निधन होता है, तो कार्डिनल्स (चर्च के उच्च अधिकारी) रोम में इकट्ठा होते हैं। सभी कार्डिनल्स को वेटिकन सिटी में सिस्टिन चैपल में एकत्रित किया जाता है, जहाँ वे बाहरी दुनिया से पूरी तरह से अलग-थलग रहते हैं। इस दौरान मीडिया, मोबाइल फोन, और अन्य संचार उपकरणों का उपयोग प्रतिबंधित होता है।

  • कार्डिनल्स की संख्या और योग्यता: कॉनक्लेव में केवल वे कार्डिनल्स भाग ले सकते हैं, जिनकी आयु 80 वर्ष से कम हो। इन कार्डिनल्स की संख्या अधिकतम 120 होती है। सभी कार्डिनल्स को गोपनीयता की शपथ लेनी होती है।

  • मतदान प्रक्रिया: कॉनक्लेव के दौरान, कार्डिनल्स गुप्त मतदान करते हैं। प्रत्येक कार्डिनल को 'Eligo in Summum Pontificem' (मैं सर्वोच्च पोप के रूप में चुनता हूँ) लिखे गए मतपत्र दिए जाते हैं। मतपत्रों को सिस्टिन चैपल में एक बड़े प्याले में डाला जाता है। मतगणना के बाद, यदि किसी उम्मीदवार को दो-तिहाई बहुमत मिलता है, तो उसे पोप चुना जाता है। यदि दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलता, तो मतपत्र जलाए जाते हैं, जिससे काले धुएं का संकेत मिलता है। जब दो-तिहाई बहुमत प्राप्त होता है, तो मतपत्र जलाए जाते हैं, जिससे सफेद धुआं निकलता है, जो नए पोप के चयन की घोषणा करता है। 

  • नई पोप की स्वीकृति और नामकरण: जब किसी कार्डिनल को दो-तिहाई बहुमत मिलता है, तो उसे पोप के रूप में स्वीकार करने के लिए पूछा जाता है। यदि वह स्वीकार करता है, तो वह एक पोप नाम चुनता है। इसके बाद, उसे पोप के वस्त्र पहनाए जाते हैं, और वह सेंट पीटर्स बासिलिका के बालकनी से दुनिया को अपनी पहली आशीर्वाद देता है।