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पद्म श्री मूर्तिकार राम सुतार का 101 वर्ष की उम्र में निधन, नोएडा स्थित अपने आवास पर ली अंतिम सांस


नोएडा: भारतीय मूर्तिकला को वैश्विक पहचान दिलाने वाले पद्म श्री सम्मानित वरिष्ठ मूर्तिकार राम सुतार का बुधवार देर रात निधन हो गया। 101 वर्ष की आयु में उन्होंने नोएडा स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय कला, संस्कृति और मूर्तिकला के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।

भारतीय मूर्तिकला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले, मशहूर मूर्तिकार पद्मश्री और महाराष्ट्र भूषण से सम्मानित राम सुतार का 101 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने बुधवार देर रात करीब 1:30 बजे नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही देशभर में कला, संस्कृति और बौद्धिक जगत में शोक की लहर फैल गई है।

राम सुतार भारतीय मूर्तिकला के उन विरले कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने अपनी रचनात्मक साधना से इतिहास रचा। वे पद्मश्री, महाराष्ट्र भूषण सहित कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मानों से अलंकृत थे। भारत सरकार और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों द्वारा उन्हें कला के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए अनेक बार सम्मानित किया गया।

आजादी के बाद देश में बने अनेक राष्ट्रीय नेताओं के स्मारक, ऐतिहासिक प्रतिमाएं और जन-आस्था से जुड़ी मूर्तियां उनकी अद्भुत कला का जीवंत उदाहरण हैं। भारत के साथ-साथ विदेशों में स्थापित उनकी कृतियों ने भारतीय मूर्तिकला परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाई। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ जैसी ऐतिहासिक और भव्य परियोजना में भी उनके मार्गदर्शन और योगदान को विशेष रूप से याद किया जाता है।

101 वर्षों की दीर्घायु में भी राम सुतार का कला से जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ। वे अंतिम समय तक सृजनशीलता, अनुशासन और समर्पण के प्रतीक बने रहे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। राम सुतार के निधन से भारतीय कला, संस्कृति और मूर्तिकला के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति हुई है। उनका अंतिम संस्कार आज सुबह 11 बजे किया जाएगा। देशभर से कलाकार, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक हस्तियां उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रही हैं।