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'India' that is 'Bharat'; राष्ट्रपति के पत्र से शुरू हुई नाम बदलने की अटकलें


नई दिल्ली: साल 2017 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड बहुमत वाली सरकर सत्ता में आई। इसके बाद सीएम योगी ने राज्य के  जिलों के नाम बदलना शुरू किया। संगम नगरी इलाहबाद को उनका पौराणिक नाम प्रयागराज वापस दिया गया। मर्यादा पुरुषोत्तम राजा राम की जन्मस्थली को फ़ैजाबाद से अयोध्या किया गया। इसके बाद राज्य के कई जिलों के नाम को बदलकर सतयुग में जो नाम से जाना जाता था वह रखा गया। 

पौराणिक शहरो के नाम बदलने का निर्णय केवल यूपी तक सिमित नहीं रहा। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के कई जिलों के नामों में बदलाव किया गया। जैसे होशंगाबाद को नर्मदापुरम, महाराष्ट्र में औरंगाबाद को छत्रापति संभाजीनगर, उस्मानाबाद को धाराशिव नाम रखा गया। जिलों के बदलने नामों की तर्ज पर अब जल्द ही देश का नाम भी बदलने वाला है। ऐसा हम नहीं बल्कि केंद्र सरकार और विपक्षी गठबंधन के नेताओं की बयानबाजी और पत्रों से चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, राष्ट्रपति द्वारा जी20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के लिए भोज का आयोजन किया गया है। जिसमें प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया की जगह प्रेसिडेंट ऑफ़ भारत उल्लेखित है। 

क्या है पूरा मामला?  

भारत में आठ सितंबर से 10 सितंबर के बीच राजधानी दिल्ली में जी20 की बैठक का आयोजन होने वाला है। इस बैठक में जी20 देशो के राष्ट्राध्यक्ष भाग लेने वाले हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक जैसे बड़े देशों के नेता शामिल होने वाले हैं। नौ सितंबर को सभी राष्ट्राध्यक्षों के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में भोज का आयोजन किया है। इसके लिए सभी राष्ट्राध्यक्षों को राष्ट्रपति भवन द्वारा निमंत्रण पत्र जारी किया है। जिसमें प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया की जगह प्रेसिडेंट ऑफ़ भारत लिखा गया है। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल है।

वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद ह्रदय नारायण यादव ने पत्र लिखकर इंडिया की जगह भारत रखने की मांग की है। यही नहीं असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरमा ने अपने ट्वीट में रिपब्लिक ऑफ़ इंडिया की जगह रिपब्लिक ऑफ़ भारत लिखा। इसके पहले बीते शुक्रवार को राष्ट्रीय सवयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक बैठक में देश का एक नाम रखने की बात कही थी। संघ प्रमुख ने कहा था कि, देशवासियों को अब देश को एक नाम ही याद रखना चाहिए। 

विपक्ष ने सरकार पर बोला हमला 

राष्ट्रपति भवन के पत्र और भाजपा नेताओं की मांग पर विपक्षियों में हड़कंप मच गया है। कांग्रेस इसको लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर इंडिया गठबंधन से डरने की बात तक कह दी है। कांग्रेस के मीडिया प्रमुख जयराम रमेश ने पत्र को ट्वीट करते हुए मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "तो ये खबर वाकई सच है. राष्ट्रपति भवन ने 9 सितंबर को जी20 रात्रिभोज के लिए सामान्य 'भारत के राष्ट्रपति' के बजाय 'भारत के राष्ट्रपति' के नाम पर निमंत्रण भेजा है। अब, संविधान में अनुच्छेद 1 पढ़ सकता है: "भारत, जो भारत था, राज्यों का एक संघ होगा।" लेकिन अब इस "राज्यों के संघ" पर भी हमला हो रहा है।"

कांग्रेस नेता ने अगले ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोलते हुए लिखा, मोदी इतिहास को विकृत करना और भारत को विभाजित करना जारी रख सकते हैं, जो भारत है, जो राज्यों का संघ है। लेकिन हम विचलित नहीं होंगे। आख़िर क्या है India पार्टियों का उद्देश्य? यह भारत है- सद्भाव, मैत्री, मेल-मिलाप और विश्वास लाए। जुड़ेगा भारत, जीतेगा भारत!"