logo_banner
Breaking
  • ⁕ पुलिस भर्ती की प्रक्रिया आज से हुई शुरू, 130 पदों के लिए 71,148 उम्मीदवारों ने किया आवेदन ⁕
  • ⁕ 23 फरवरी से शुरू होगा विधानसभा का बजट सत्र, 6 मार्च को पेश होगा बजट; 25 मार्च तक चलेगा विधानमंडल का सत्र ⁕
  • ⁕ निम्न पैनगंगा प्रकल्प: यवतमाल जिलाधिकारी के खिलाफ भड़का जनआक्रोश; ग्रामसभा के विरोध के बावजूद ब्लास्टिंग की अनुमति देने का आरोप ⁕
  • ⁕ Nagpur: कोराडी में 15 वर्षीय छात्रा ने की आत्महत्या, घर में फांसी लगाकर दी जान ⁕
  • ⁕ Bhandara: सेतु केंद्र का संचालक 11 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार, असली दस्तावेज लौटाने के लिए मांगे थे पैसे ⁕
  • ⁕ रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी! नागपुर से मुंबई और पुणे के लिए चलेंगी स्पेशल ट्रेनें; अकोला के यात्रियों को मिलेगा बड़ा फायदा ⁕
  • ⁕ Nagpur: यशोधरानगर में ऑटो वर्कशॉप में हुई चोरी, 3.40 लाख का सामान गायब, पुलिस कर रही खोजबीन ⁕
  • ⁕ Akola: खुदको आईबी अधिकारी बताकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में घुसपैठ करने वाले आरोपी को तीन दिन की पुलिस हिरासत ⁕
  • ⁕ Yavatmal: मुलावा फाटा-सावरगाव रोड पर रोंगटे खड़े करने वाला हादसा, युवक का सिर 12 किमी तक टैंकर में रहा फंसा ⁕
  • ⁕ Amravati: वलगाव में खेत में किसान के साथ अज्ञात लोगों ने की मारपीट, डॉक्टरों की लापरवाही से किसान की मौत होने का आरोप ⁕
Chandrapur

Chandrapur: रामू तिवारी को अध्यक्ष पद से हटाने का खामियाज़ा कांग्रेस को संगठनात्मक असंतुलन का सीधा असर चंद्रपुर मनपा चुनाव पर


चंद्रपुर: शहर महानगरपालिका चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 27 सीटें हासिल हुईं, लेकिन इसके बावजूद पार्टी स्पष्ट बहुमत पाने में नाकाम रही। सत्ता गठन नहीं हो पाने से कांग्रेस के भीतर अब आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। पार्टी के भीतर यह चर्चा ज़ोर पकड़ रही है कि तत्कालीन शहर जिला अध्यक्ष रामू तिवारी को चुनाव से ठीक पहले पद से हटाने का निर्णय कांग्रेस को भारी पड़ा।

पिछले छह वर्षों से रामू तिवारी कांग्रेस के शहरजिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने आंदोलनों, मोर्चों और विभिन्न संगठनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत किया। उनके नेतृत्व में संपन्न लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली, वहीं इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को जनता का अच्छा समर्थन मिला। इससे यह माना जा रहा था कि मजबूत संगठन का लाभ महानगरपालिका चुनाव में निश्चित रूप से मिलेगा। हालांकि, मनपा चुनाव से लगभग एक माह पहले ही रामू तिवारी को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। इस फैसले से पार्टी का संगठनात्मक संतुलन बिगड़ गया और इसका सीधा असर टिकट वितरण प्रक्रिया पर पड़ा।

पिछले कई वर्षों से सक्रिय रूप से काम कर रहे और चुनाव को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे अनेक कार्यकर्ताओं के टिकट काट दिए गए। उनकी जगह नए और कथित रूप से “पसंदीदा” उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी नाराज़गी फैल गई। इस असंतोष का प्रभाव चुनाव परिणामों में भी साफ दिखाई दिया। कांग्रेस को करीब 40 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन पार्टी को 27 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। परिणामस्वरूप कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और सत्ता गठन के लिए उसे अन्य दलों पर निर्भर रहना पड़ा। इसी कारण महापौर चुनाव में भी कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।

वर्तमान में कांग्रेस के भीतर यह चर्चा आम हो गई है कि चुनाव से ठीक पहले संगठन में किए गए बदलाव और टिकट वितरण में हुई गड़बड़ियों के चलते ही पार्टी सत्ता से दूर रह गई। खास तौर पर रामू तिवारी को अध्यक्ष पद से हटाने का फैसला कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हुआ, ऐसी राय अब पार्टी कार्यकर्ताओं में खुलकर सामने आ रही है।