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निम्न पैनगंगा प्रकल्प: यवतमाल जिलाधिकारी के खिलाफ भड़का जनआक्रोश; ग्रामसभा के विरोध के बावजूद ब्लास्टिंग की अनुमति देने का आरोप


यवतमाल: निम्न पैनगंगा परियोजना एक बार फिर विवादों के घेरे में है। पेसा (PESA) कानून के तहत ग्रामसभा द्वारा प्रस्ताव पारित कर ब्लास्टिंग (भूसुरुंग विस्फोट) पर रोक लगाने के बावजूद, यवतमाल जिलाधिकारी द्वारा अपने स्तर पर अनुमति दिए जाने से आदिवासी क्षेत्रों में भारी तनाव व्याप्त है। 'निम्न पैनगंगा धरण विरोधी संघर्ष समिति' ने इसे लोकतंत्र की हत्या और 'जंगलराज' करार देते हुए आज जिलाधिकारी कार्यालय पर धावा बोला और अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

लगातार विवादों में रहने वाले निम्न पैनगंगा प्रोजेक्ट का काम एक बार फिर कानूनी और संवैधानिक लड़ाई में उलझ गया है। संघर्ष समिति का आरोप है कि प्रशासन पेसा ग्राम पंचायतों के मौलिक अधिकारों का हनन कर 'हिटलरशाही' तरीके से काम आगे बढ़ा रहा है।

ग्रामसभा के प्रस्ताव को ठेंगा खड़का ग्राम पंचायत (जो पेसा क्षेत्र के अंतर्गत आती है) ने 26 दिसंबर 2025 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर बांध के मिट्टी काम, खुदाई और भूसुरुंग विस्फोट (Blasting) की अनुमति की समय सीमा बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया था। ग्रामसभा ने स्पष्ट किया था कि उनकी अनुमति के बिना कोई विस्फोट न किया जाए। इसके बावजूद, जिलाधिकारी यवतमाल ने 6 जनवरी 2026 को अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए सिंचाई विभाग और ठेकेदार को 31 दिसंबर 2026 तक ब्लास्टिंग की अनुमति दे दी।

कानून के उल्लंघन का आरोप संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि भूसंपादन कानून 2013 के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों (PESA) में जमीन अधिग्रहण या किसी भी बड़े कार्य के लिए धारा 41/3 के तहत ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य है। प्रशासन द्वारा इसे नजरअंदाज करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार है। वर्तमान में खड़का और खंबाला के बीच पैनगंगा नदी पर बांध की दीवार के लिए दिन-रात ब्लास्टिंग और खुदाई का काम जारी है, जिससे स्थानीय निवासियों में असुरक्षा का भाव है।

जिलाधिकारी को दी चुनौती आज संघर्ष समिति के सदस्यों ने जिलाधिकारी से प्रत्यक्ष मुलाकात कर तीखे सवाल किए। समिति ने मांग की कि, "यदि जिलाधिकारी को ग्रामसभा के प्रस्ताव को खारिज करने का अधिकार है, तो पेसा ग्राम पंचायतों के सभी अधिकार लिखित रूप में समाप्त कर दिए जाएं, वरना इस अवैध अनुमति को तुरंत वापस लिया जाए।"

प्रशासन का रुख विरोध को देखते हुए जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही सिंचाई विभाग के अधिकारियों और संघर्ष समिति के बीच एक संयुक्त बैठक बुलाएंगे ताकि इस मुद्दे का समाधान निकाला जा सके। हालांकि, संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी शर्तों को माना नहीं जाता, वे इस 'ठोकशाही' के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे।