Akola: अकोट के बेलोरा वन क्षेत्र में अवैध उत्खनन और वृक्षों की अंधाधुंध कटाई, 6 ट्रक जप्त; लेकिन मशीनों पर कार्रवाई में 'अभय' क्यों?
अकोला: अकोट तहसील के बेलोरा गांव में प्रकृति के साथ खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ के 'राखी वन' क्षेत्र (कंपार्टमेंट बी-11, गट क्रमांक 16) में बड़े पैमाने पर गौण खनिजों का अवैध उत्खनन और पेड़ों की कटाई की जा रही थी। वन विभाग की टीम ने छापेमारी कर 6 ट्रकों को तो जप्त कर लिया है, लेकिन मुख्य मशीनों को छोड़ने पर अब सवाल उठने लगे हैं।
छापेमारी में मिलीं मशीनें, पर कार्रवाई केवल ट्रकों तक सीमित
वन विभाग के दस्ते ने जब मौके पर छापा मारा, तब वहां पोकलैंड (Poklane) और जेसीबी (JCB) मशीनों की सहायता से खुदाई का काम जोरों पर था। नियमानुसार, अवैध उत्खनन में इस्तेमाल होने वाले पोकलैंड और जेसीबी जैसे भारी यंत्रों को तुरंत जप्त कर ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज करना अनिवार्य होता है। हालांकि, आश्चर्यजनक रूप से वन विभाग ने केवल ट्रकों को जप्त किया और मुख्य मशीनों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
क्या अधिकारियों का मिल रहा है ठेकेदार को संरक्षण?
इस मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। चर्चा है कि संबंधित विभाग के कुछ अधिकारी ठेकेदार को 'अभय' (संरक्षण) दे रहे हैं, जिसके कारण मुख्य यंत्रों को जप्त नहीं किया गया। स्थानीय लोगों का सवाल है कि आखिर किसके दबाव में आकर पोकलैंड और जेसीबी को मौके से जाने दिया गया?
प्रमुख मुद्दे और जन आक्रोश:
- नियमों की अनदेखी: अवैध उत्खनन स्थल पर मौजूद सभी वाहनों और मशीनों को सील करना कानूनन जरूरी है।
- पर्यावरण को नुकसान: आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध खुदाई और वृक्षों की कटाई से पारिस्थितिकी को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
- जांच की मांग: नागरिकों ने मांग की है कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
इस घटना के बाद से बेलोरा और अकोट क्षेत्र में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन जन दबाव के बाद ठेकेदार और दोषी मशीनों पर क्या कार्रवाई करता है।
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