फुटाल तालाब के संरक्षण पर NGT सख्त, NMC को 23.6 लाख की सीवेज लाइन के लिए 'टाइम-बाउंड' प्लान देने का आदेश
नागपुर: शहर के ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल 'फुटाल तालाब' की गिरती सेहत को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। NGT की वेस्टर्न ज़ोन बेंच ने नागपुर नगर निगम (NMC) को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि तालाब में गिरने वाले गंदे पानी (untreated sewage) को रोकने के लिए प्रस्तावित 23.63 लाख रुपये की नई सीवेज लाइन का एक निश्चित समय-सीमा (Time-bound plan) वाला खाका पेश करें।
NGT की सुनवाई के मुख्य बिंदु:
- पुराना नेटवर्क फेल: नगर निगम ने ट्रिब्यूनल के सामने स्वीकार किया है कि फुटाल बस्ती के पास का मौजूदा सीवेज नेटवर्क काफी पुराना और अपर्याप्त हो चुका है, जिससे आबादी बढ़ने के कारण गंदा पानी सीधे तालाब में मिल रहा है।
- PWD और महामेट्रो को नोटिस: ट्रिब्यूनल ने इस मामले का दायरा बढ़ाते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) को भी पक्षकार बनाया है, क्योंकि तालाब की दीवारों के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी उनकी है। साथ ही, नागपुर सुधार प्रन्यास (NIT) और महामेट्रो को पर्यावरण प्रबंधन योजना (EMP) के क्रियान्वयन के लिए जवाबदेह ठहराया गया है।
- अवैध तबेले और प्रदूषण: कोर्ट ने क्षेत्र में चल रहे 8 अवैध तबेलों से होने वाले प्रदूषण पर भी संज्ञान लिया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) को निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि गोबर और अन्य अपशिष्ट तालाब में न बहे।
फुटाल फाउंटेन प्रोजेक्ट की वापसी: 12 फरवरी से शुरू होगा काम
एक तरफ जहाँ संरक्षण को लेकर कानूनी शिकंजा कसा है, वहीं दूसरी ओर फुटाल के बहुप्रतीक्षित म्यूजिकल फाउंटेन को पुनर्जीवित करने की तैयारी भी तेज हो गई है।
- नई केबल्स और पंप: तकनीकी ऑडिट के बाद पता चला है कि पिछले दो सालों से बंद पड़े सिस्टम की केबल्स और पंप के कुछ हिस्से खराब हो गए हैं। महामेट्रो के अधिकारियों के अनुसार, नई केबल्स की खेप 12 फरवरी तक नागपुर पहुंच जाएगी, जिसके बाद मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू होगा।
- फ्रेंच टीम का निरीक्षण: हाल ही में फ्रांस की एक विशेषज्ञ टीम ने प्रोजेक्ट का दौरा कर तकनीकी खराबी की पहचान की थी। बताया जा रहा है कि फाउंटेन के नोजल और अन्य छोटे हिस्सों को भी बदला जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का रुख: 'वेटलैंड' नहीं, पर सुरक्षा जरूरी
बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने फुटाल तालाब को 'वेटलैंड' (Wetland) की श्रेणी में रखने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने इसे एक 'मानव निर्मित जलाशय' (Man-made waterbody) करार दिया है। हालांकि, कोर्ट ने 'पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन' का हवाला देते हुए साफ किया कि भले ही यह वेटलैंड न हो, लेकिन इसके संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन (Ecological balance) की जिम्मेदारी प्रशासन की है।
"विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलने चाहिए। तालाब की गरिमा और वहां के जलीय जीवन को नुकसान पहुंचाए बिना ही पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।" - जस्टिस बी.आर. गवई (सुप्रीम कोर्ट)
अगली सुनवाई और उम्मीदें
NGT ने मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च, 2026 को तय की है। तब तक NMC को अपनी प्रगति रिपोर्ट और सीवेज लाइन का पूरा चार्ट पेश करना होगा। नागपुर वासियों को उम्मीद है कि इन सख्त निर्देशों के बाद फुटाल तालाब का पुराना स्वरूप और स्वच्छता वापस लौट आएगी।
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