सदर फ्लाईओवर के 'डेथ ट्रैप' से मिलेगी मुक्ति; RBI चौक के बदले अब मॉरिस कॉलेज के पास होगी लैंडिंग, 10 दिनों में आएगी नई DPR
नागपुर: नागपुर के सदर फ्लाईओवर की दोषपूर्ण डिजाइन (Faulty Design) को लेकर पिछले 7 महीनों से चल रहा सस्पेंस अब खत्म हो गया है। महा मेट्रो ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ लंबी चर्चा के बाद नई डिजाइन को लगभग फाइनल कर लिया है। इस बदलाव से न केवल ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, बल्कि कस्तूरचंद पार्क की ऐतिहासिक विरासत को भी सुरक्षित रखा जाएगा।
क्या है नया बदलाव?
पुराने डिजाइन के विपरीत, अब यह फ्लाईओवर लिबर्टी टॉकीज से शुरू होकर सीधे RBI पेट्रोल पंप के सामने उतरेगा।
- दो सिग्नलों से छुटकारा: अब सदर की ओर से आने वाले वाहनों को कस्तूरचंद पार्क और आरबीआई चौक के ट्रैफिक सिग्नल पर नहीं रुकना होगा।
- जाम से मुक्ति: आरबीआई चौक पर होने वाली ट्रैफिक की 'बॉटलनेक' समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
कस्तूरचंद पार्क की जमीन का कम होगा अधिग्रहण
मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, पहले लैंडिंग के लिए कस्तूरचंद पार्क की काफी जमीन लेने की योजना थी। लेकिन अब डिजाइन में सुधार के बाद:
- पार्क में केवल पिलर बनाए जाएंगे।
- जमीन की जरूरत काफी कम हो गई है, जिससे हेरिटेज लुक प्रभावित नहीं होगा।
- जमीन अधिग्रहण की लागत में कटौती हुई है, हालांकि फ्लाईओवर की लंबाई बढ़ने से निर्माण लागत (Cost) बढ़ना तय है।
नेशनल हाईवे बंद होने से जनता परेशान
डिजाइन में त्रुटि के कारण पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी चलते नेशनल हाईवे को बंद करना पड़ा है। इसके चलते:
डिजाइन में त्रुटि के कारण पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी चलते नेशनल हाईवे को बंद करना पड़ा है। इसके चलते:
- कामठी रोड जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
- सदर का भीतरी इलाका पूरी तरह से ट्रैफिक से घिर गया है।
- व्यापारी और आम जनता रोजाना घंटों जाम में फंस रहे हैं।
लागत में वृद्धि और टाइमलाइन
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पहले इस सुधार के लिए 36 करोड़ रुपये मंजूर किए थे, लेकिन अब फ्लाईओवर की लंबाई बढ़ने के कारण लागत बढ़ेगी।
- DPR: अगले 10 दिनों में नई विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) गडकरी के समक्ष पेश की जाएगी।
- टेंडर: डिजाइन फाइनल होते ही टेंडर जारी होंगे।
- काम की शुरुआत: उम्मीद है कि फरवरी या मार्च 2026 तक जमीन पर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
- प्रशासनिक तालमेल: महा मेट्रो अब मनपा (NMC) और NHAI जैसी एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है ताकि निर्माण के दौरान ट्रैफिक का रूट सुगम रहे और लोगों को कम से कम तकलीफ हो।
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