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'सोशल मीडिया एक अनियंत्रित अभिव्यक्ति, जहां फ्रीडम ऑफ़ स्पीच के नाम पर परोसा जा रहा अश्लील कंटेंट', आईटी मंत्री वैष्णव की बड़ी टिप्पणी


नई दिल्ली: सोशल मीडिया को लेकर विवाद लगातार जारी है। कोई इसे अभिव्यक्ति की आजादी बताता है तो कोई इसे झूठ और फरेब परिसने का प्लेटफार्म। सोशल मीडिया पर फायरवाल यानी बैरियर लगाने जिससे उसमें परोसने वाले कंटेंट का छाना जा सके। यानी की यह जांचा जा सके की जो उपलोड किया जा रहा है वह सही है या नहीं। इसी के साथ व्यूज के नाम पर जिस तरह की अश्लील सामग्री डाली जा रही है उसपर रोक लगाई जा सके। इन्हीं चर्चाओं के बीच केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने सोशल मीडिया को अनियंत्रित अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि, " फ्रीडम ऑफ़ स्पीच के नाम पर परोसे जा रहे अश्लील कंटेंट पर रोक लगनी बहुत जरुरी है।"

संसद में प्रश्नकाल के दौरान सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री की जांच के लिए कानूनों की मांग पर सवाल पूछा गया। जिसपर जवाब देते हुए वैष्णव ने कहा कि, "यह विषय वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है। आज जिस तरह से संपादकीय सामग्री हुआ करती थी, संपादकीय जाँच होती थी, कोई चीज़ सही है या गलत है, उसके बारे में पूरा निर्णय लिया जाता था, वह समाप्त हो गया है।"

उन्होंने आगे कहा, "आज सोशल मीडिया एक तरफ़ प्रेस की आज़ादी का एक बहुत बड़ा माध्यम है, लेकिन साथ ही, दूसरी तरफ़ उस संपादकीय जाँच के समाप्त होने से यह एक अनियंत्रित अभिव्यक्ति है जिसमें कई तरह की अश्लील सामग्री भी चलती है। मौजूदा कानून को निश्चित रूप से और मजबूत करने की ज़रूरत है और मैं अनुरोध करूँगा कि इस पर आम सहमति बनाई जानी चाहिए।"

आईटी मंत्री ने आगे कहा कि, "हमारे देश की संस्कृति और उन देशों की संस्कृति में बहुत अंतर है जहां से ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आए हैं इसलिए मैं चाहूंगा कि संसद की स्थायी समिति इस मुद्दे को उठाए और इस पर सख्त कानून बने।"