देवेंद्र फडणवीस जा रहे दिल्ली, चर्चाओं के बीच अमृता फडणवीस दिया बड़ा बयान; कयासों को मिला बल
नागपुर: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की चर्चाओं ने फिर जोर पकड़ लिया है। राजनीतिक हलकों में इसको लेकर कायस तेजी से शुरू है कि, मुख्यमंत्री फड़णवीस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में बड़ी जिम्मेदारी दी जाने वाली है। इन्ही चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फडणवीस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अमृता ने कयासों को अफवाह बताते हुए कहा कि, "मुख्यमंत्री अभी महाराष्ट्र की सेवा कर रहे हैं और उन्हें आगे की यही सेवा करने दिया जाना चाहिए। मिसेस फडणवीस मंगलवार को नागपुर के वीएनआईटी कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुई, जहां पत्रकारों द्वारा पूछे सवाल पर यह जवाब दिया।
अमृता फडणवीस ने कहा, "देवेंद्रजी नागपुर और महाराष्ट्र के सेवक हैं। उन्हें यहीं काम करने दीजिए, सेवा करने दीजिए। उन्हें दिल्ली क्यों भेज रहे हैं? महाराष्ट्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र देश का अग्रणी राज्य है।" ज्ञात हो कि, मुख्यमंत्री फडणवीस चर्चाओं को कोरी अफवाह बता कर स्तिथि स्पष्ट कर चुके हैं।
कांग्रेस अपना संविधान बना रही
स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन के दरमियान सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा अपने गए आचरण पर भी अमृता फडणवीस ने कांग्रेस को आड़े हाथ लिया। मिसेस फडणवीस ने कहा, "कांग्रेस नया संविधान बनाना चाहती है। जो बिल पारित हुआ है कांग्रेस उसे मनाना नहीं चाहती है। उस कानून के खिलाफ जाकर उन्हें नया बनाना है।" अमृता ने लिखा, "लेकिन उसे हम नहीं होने देंगे, हम इसका विरोध करेंगे।"
कांग्रेस अपना संविधान बना रही
स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन के दरमियान सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा अपने गए आचरण पर भी अमृता फडणवीस ने कांग्रेस को आड़े हाथ लिया। मिसेस फडणवीस ने कहा, "कांग्रेस नया संविधान बनाना चाहती है। जो बिल पारित हुआ है कांग्रेस उसे मनाना नहीं चाहती है। उस कानून के खिलाफ जाकर उन्हें नया बनाना है।" अमृता ने लिखा, "लेकिन उसे हम नहीं होने देंगे, हम इसका विरोध करेंगे।"
युवाओं की प्रगति को सही दिशा देनी होगी
जेन जी आंदोलन पर बोलते हुए अमृता फडणवीस ने कहा, "मैंने पहले भी कहा है कि जंतर-मंतर पर आंदोलन की शुरुआत पेपर लीक के मुद्दे से हुई थी और उस समय यह आंदोलन सही था। लेकिन बाद में इसमें अलग-अलग सोशल एलिमेंट्स जुड़ते गए, जिससे एक अलग माहौल बन गया। अगर आंदोलन केवल अपने मूल मुद्दे तक सीमित रहता, तो वह ज्यादा प्रासंगिक और प्रभावी होता।"
उन्होने आगे कहा, "हम जब मेक इन इंडिया की बात करते हैं, तो यह तभी पूरी तरह सफल होगा, जब जेन-ज़ी भी इसमें शामिल हो। युवाओं को जिस तरह की सुविधाओं और अवसरों की जरूरत है, वे उन्हें उपलब्ध कराए जाने चाहिए। चाहे नागपुर जैसे शहर हों या मुंबई जैसे बड़े शहर, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में युवाओं को बेहतर सुविधाएं और अवसर मिलना जरूरी है। हमें युवाओं की प्रगति को सही दिशा देनी होगी।"
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